राजस्थान का असर यू.पी. पर?

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नई दिल्ली। राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की जीत के बाद उत्तर प्रदेश में भाजपा के लिखाफ ”धर्मनिरपेक्ष गठबंधनÓÓ बनाने के प्रयासों पर संकट के बादल छा गये हैं। उत्तर प्रदेश से लोकसभा के 80 सांसद चुनकर जाते हैं। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद के गैर भाजपायी के रूप में प्रस्तुत करने का जहाँ अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी और आमयावती की बहुजन समाज पार्टी विरोध कर रही है, वही हाल राहुल गाँधी के साथ कुछ अपनी पार्टी में राज्य कांग्रेस नेताओं के एक प्रतिनिधिमण्डल ने पार्टी के लिए ”अकेला चलोÓÓ की रणनीति की वकालत की। बिहार में जहाँ राष्ट्रीय जनता दल (आर.जे.डी.) के नेतृत्व वाले गठबंधन को कांग्रेस के दृष्टिकोण से अधिक स्थायी माना जा रहा है, वहीं उत्तर प्रदेश में सीटों के बंटवारे के समझौते को लेकर गंभीर पेचीदीगियां सामने आ रही है।
राज्य कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता डॉ. देवेन्द्र प्रतापसिंह ने बताया कि ”एक चुनाव पूर्ण गठजोड़ के बजाए हमने सपा और बसपा के साथ ”मित्रवत संघर्षÓÓ की एक व्यवस्था का सुझाव दिया है। तीनों पार्टियां चाहे कितनी भी सीटों पर चुनाव लड़े, लेकिन कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में एक-दूसरे की मदद कर सकती हैं।ÓÓ
तीन राज्यों में कांग्रेस की जीत के बाद सपा और बसपा खेमों में यह आशंका व्याप्त हो गई है कि यू.पी. महागठबंधन में कांग्रेस के शामिल हो जाने से दोनों पार्टियों का परम्परागत जनाधार छिटकेगा। पेशे से जीवनी लेखक एवं पत्रकार फें्रक हुज़ूर का कहना था गठबंधन में कांग्रेस के तीसरी घूरी के रूप में आगमन सेसपा का मुस्लिम जनाधर खिकस कर कांग्रेस के पक्ष में जा सकता है। राजस्थान और मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकारों के प्रति जहां बसपा और सपा दोनों ने अपना समर्थन व्यक्ति किया है, वहीं कांग्रेस के नवीन मुख्यमंत्रियों के शपथ ग्रहण समारोहों में अखिलेश यादव और मायावती अनुपस्थित रहे और इन्होंने संकेत दिया कि वे यू.पी. में सीटों के बंटवारे का फॉर्मूला तय करने के दौरान कांग्रेस के साथ सख्ती से पेश आएंगे।
सूत्रों ने बताया कि सपा-बसपा गठजोड़ राज्य की 80 लोकसभा सीटों मं से कांग्रेस की 8 से ज्यादा सीटों देने के मूढ़ में नहीं हैं। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि ”एक बेतुका फॉर्मला कांग्रेस को कतई स्वीकार्य नहीं है क्योंकि पार्टी जब 2009 का लोकसभा चुनाव यू.पी. में अकेली लड़ी थी, उसने 23 सीटें तो तभी जीत ली थी।ÓÓ इससे पूर्व 2004 के आम चुनाव में यू.पी. में कांग्रेस ने 9 लोकसभा सीटें जीती थीं और यहां पार्टी की जीत का आंकड़ा 2014 के लोकसभा चुनाव में एक दम नीचे गिरकर 2 सीटों पर आ गया था।

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