अमूल भगाओ, सरस बचाओ’: श्वेत क्रांति के नायक रामचन्द्र चौधरी के नेतृत्व में अजमेर में सरस सहकार महाकुंभ में गूंजी हुंकार, भाजपा सरकार पर फूटा जन-आक्रोश

अमूल भगाओ, सरस बचाओ’: श्वेत क्रांति के नायक रामचन्द्र चौधरी के नेतृत्व में अजमेर में सरस सहकार महाकुंभ में गूंजी हुंकार, भाजपा सरकार पर फूटा जन-आक्रोश
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‘अमूल भगाओ, सरस बचाओ’: श्वेत क्रांति के नायक रामचन्द्र चौधरी के नेतृत्व में अजमेर में सरस सहकार महाकुंभ में गूंजी हुंकार, भाजपा सरकार पर फूटा जन-आक्रोश
अजमेर, 23 अगस्त 2026:
राजस्थान की शान और किसानों की जीवनरेखा मानी जाने वाली ‘सरस’ डेयरी व्यवस्था को खत्म कर गुजरात के ‘अमूल’ को पिछले दरवाजे से थोपने की साजिश के खिलाफ रविवार को अजमेर का कच्छावा गार्डन (तबीजी) एक ऐतिहासिक जन-आक्रोश का गवाह बना। अजमेर डेयरी सदर और ‘श्वेत क्रांति के नायक’ रामचन्द्र चौधरी के मजबूत नेतृत्व में आयोजित इस महाकुंभ में हजारों की तादाद में दुग्ध उत्पादकों, किसानों, युवाओं और महिलाओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। रामचन्द्र चौधरी की अगुवाई में उठी इस हुंकार ने साफ कर दिया है कि यह केवल एक डेयरी आंदोलन नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन की एक निर्णायक लड़ाई है।
मंच से सामने हजारों की संख्या में उमड़ी भीड़ का यह अभूतपूर्व जोश देखकर पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा गदगद हो उठे। कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने रामचन्द्र चौधरी के इस जन-आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन देते हुए केंद्र की मोदी सरकार और राज्य की भजनलाल सरकार की नीतियों पर जमकर निशाना साधा।
मंच पर एकजुट हुए दिग्गज और सौंपा 11 सूत्रीय मांग पत्र
इस महाकुंभ में पशुपालकों की आवाज को बुलंद करने के लिए मंच पर कांग्रेस दिग्गजों का भारी जमावड़ा रहा। पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा, डेयरी सदर रामचन्द्र चौधरी, किशनगढ़ विधायक डॉ. विकास चौधरी, पूर्व मंत्री रामलाल जाट, पूर्व मंत्री धर्मेंद्र सिंह राठौड़ और महिला प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. सारिका सिंह के साथ वरिष्ठ नेता जोग सिंह बालोट, रामलाल विश्नोई और भीखाराम चौधरी ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई।ञापन: इस ऐतिहासिक अवसर पर दुग्ध उत्पादकों और उपस्थित सभी नेताओं ने सर्वसम्मति से प्रशासन को 11 सूत्रीय मांगों का एक कड़ा ज्ञापन सौंपा, जिसमें अमूल का पंजीयन रद्द करने, सरस को बचाने और पशुपालकों के अनुदान का बकाया तुरंत जारी करने की मांग की गई है।
दिग्गजों की दहाड़: “यह पूंजीपतियों की सरकार है”
मंच से कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने आक्रामक तेवर अपनाते हुए डेयरी विवाद के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और महंगाई के मुद्दों पर भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया।
गोविंद सिंह डोटासरा का प्रहार:
मंच से गरजते हुए डोटासरा ने कहा, “यह तथाकथित ‘डबल इंजन’ की सरकार दरअसल ‘डबल बर्बादी’ की सरकार बन चुकी है। एक तरफ ये हमारे ‘सरस’ को गुजरात के व्यापारियों के हाथों नीलाम कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ इन्होंने प्रदेश की शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था का जनाजा निकाल दिया है।” उन्होंने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की विश्वस्तरीय ‘चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना’ को याद करते हुए कहा कि आज गरीब दर-दर भटकने को मजबूर है।
रामचन्द्र चौधरी की भूरि-भूरि प्रशंसा:
डोटासरा ने हजारों की भीड़ के सामने आंदोलन का नेतृत्व कर रहे रामचन्द्र चौधरी की जमकर तारीफ की। उन्होंने घोषणा करते हुए कहा, “रामचन्द्र चौधरी केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि सहकारिता की एक जीती-जागती संस्था हैं। ये असली मायनों में ‘किसानों के नेता’, ‘पशुपालकों के नेता’ और ‘सहकारिता के नेता’ हैं। दुग्ध उत्पादकों के हकों की रक्षा के लिए वे हमारे श्वेत क्रांति के सबसे बड़े नायक हैं।”
डॉ. विकास चौधरी का ओजस्वी भाषण:
युवा विधायक डॉ. विकास चौधरी ने “जय जवान, जय किसान” का गगनभेदी नारा लगाते हुए कहा, “सरस हमारी मां समान है और हम अपनी मां को पूंजीपतियों के हाथों बिकने नहीं देंगे! यह सरकार सीमा पर जवान और खेतों में किसान, दोनों को छलने का काम कर रही है।”
रामलाल जाट और धर्मेंद्र राठौड़ का कड़ा रुख:
पूर्व मंत्रियों ने एक सुर में भाजपा पर डॉ. वर्गीज कुरियन के सहकारी मॉडल की हत्या करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जो सरकार किसानों का निर्मम शोषण कर रही हो, उसे सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं है।
डॉ. सारिका सिंह का ऐतिहासिक संदर्भ:
महिला प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने 23 अगस्त 2005 को सोनिया गांधी द्वारा शुरू की गई ‘मनरेगा’ (MNREGA) योजना की वर्षगांठ याद दिलाते हुए कहा कि जहां कांग्रेस ने करोड़ों गरीबों के चूल्हे जलाए थे, वहीं आज भाजपा महिलाओं के मुंह से निवाला छीनने पर तुली है।
दिल्ली कूच का आह्वान और सुप्रीम कोर्ट का अल्टीमेटम
सभा अपने चरम पर तब पहुंची जब ‘श्वेत क्रांति के नायक’ रामचन्द्र चौधरी ने माइक संभाला। उन्होंने वहां मौजूद हजारों लोगों से सीधे संवाद करते हुए एक बहुत बड़ा आह्वान किया:
“अगर हमारी ‘सरस’ को बचाने के लिए और अपने हकों के लिए हमें दिल्ली के जंतर-मंतर तक पैदल कूच करना पड़े, तो क्या आप सब मेरे साथ चलने को तैयार हैं?”
इस एक आह्वान पर पूरा कच्छावा गार्डन नारों से गूंज उठा। हजारों किसानों, महिलाओं और युवाओं ने अपनी कुर्सियों से खड़े होकर, दोनों हाथ हवा में उठाकर रामचन्द्र चौधरी के नेतृत्व में इस आंदोलन को अपना जोरदार समर्थन दिया।
महाकुंभ का स्पष्ट अल्टीमेटम:
जनसभा के अंत में यह स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि अमूल को राजस्थान में एंट्री देने की साजिश पर तुरंत रोक नहीं लगी और 11 सूत्रीय मांगों को नहीं माना गया, तो यह जनसैलाब रामचन्द्र चौधरी के नेतृत्व में अजमेर से निकलकर दिल्ली के जंतर-मंतर तक जाएगा और जरूरत पड़ी तो देश के माननीय उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा।

admin - awaz rajasthan ki

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