राजस्थान हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला: इकबाल छीपा को प्रशासक पद से हटाने का आदेश निरस्तकेवल FIR, गिरफ्तारी या चार्जशीट के आधार पर पद से हटाना उचित नहीं — उच्च न्यायालय
राजस्थान हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला: इकबाल छीपा को प्रशासक पद से हटाने का आदेश निरस्त
केवल FIR, गिरफ्तारी या चार्जशीट के आधार पर पद से हटाना उचित नहीं — उच्च न्यायालय
अजमेर/रूपनगढ़, 1 अक्टूबर 2026।
राजस्थान उच्च न्यायालय, जयपुर पीठ ने ग्राम पंचायत रूपनगढ़, पंचायत समिति किशनगढ़, जिला अजमेर के तत्कालीन प्रशासक इकबाल छीपा को लेकर महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए पंचायत राज विभाग द्वारा दिनांक 19 जून 2026 को जारी उस आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसके माध्यम से उन्हें प्रशासक पद से हटाया गया था।
यह आदेश माननीय न्यायाधीश श्री अनूप कुमार ढंड द्वारा 24 सितंबर 2026 को S.B. Civil Writ Petition No. 13742/2026, इकबाल छीपा बनाम राज्य सरकार एवं अन्य में पारित किया गया।
मामले में इकबाल छीपा की ओर से यह पक्ष रखा गया था कि उनके विरुद्ध दर्ज FIR, गिरफ्तारी तथा चार्जशीट के आधार पर उन्हें ग्राम पंचायत रूपनगढ़ के प्रशासक पद से हटा दिया गया, जबकि केवल इन आधारों पर उन्हें पद से हटाने की वैधानिक अयोग्यता उत्पन्न नहीं होती।
माननीय उच्च न्यायालय ने राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 19(g) एवं 19(gg) का परीक्षण करते हुए स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति को पंचायत राज संस्था में पद पर बने रहने से संबंधित अयोग्यता के लिए कानून में निर्धारित परिस्थितियों का पूरा होना आवश्यक है।
न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा कि सिर्फ FIR दर्ज होने, गिरफ्तारी होने अथवा चार्जशीट पेश होने मात्र से सरपंच का पद रिक्त नहीं होता। अयोग्यता तब उत्पन्न होती है जब कानून में निर्धारित शर्तें पूरी हों—जैसे संबंधित मामले में दोषसिद्धि एवं छह माह या उससे अधिक की सजा, अथवा पांच वर्ष या उससे अधिक की सजा वाले अपराध में सक्षम न्यायालय द्वारा cognizance लेकर आरोप तय किए जाना।
न्यायालय ने पाया कि इकबाल छीपा के मामले में उस समय तक न तो सक्षम न्यायालय द्वारा cognizance लिया गया था और न ही पांच वर्ष से अधिक सजा वाले अपराध के संबंध में आरोप तय किए गए थे। साथ ही उन्हें छह माह या उससे अधिक की सजा से दोषी भी नहीं ठहराया गया था।
इन्हीं परिस्थितियों में माननीय उच्च न्यायालय ने दिनांक 19 जून 2026 के आदेश को कानून की दृष्टि से टिकाऊ नहीं मानते हुए उसे quash एवं set-aside कर दिया तथा रिट याचिका स्वीकार कर ली।
इकबाल छीपा ने कहा—
“मैंने शुरू से ही न्यायपालिका और संविधान पर पूरा विश्वास रखा। मेरे विरुद्ध की गई कार्रवाई के संबंध में मैंने कानूनी रास्ता अपनाया और माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखा। न्यायालय के आदेश ने कानून में निर्धारित प्रक्रिया और अधिकारों की महत्वपूर्ण व्याख्या की है। मैं इस आदेश का सम्मान करता हूं।”
उन्होंने कहा कि यह फैसला केवल उनके व्यक्तिगत प्रकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि पंचायत राज संस्थाओं में निर्वाचित प्रतिनिधियों अथवा पदाधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करते समय कानून में निर्धारित अयोग्यता और उचित प्रक्रिया का पालन किए जाने के महत्व को भी सामने रखता है।
इकबाल छीपा ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी अधिकारी या व्यक्ति के विरुद्ध व्यक्तिगत टिप्पणी करना नहीं है। उनका विश्वास लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक व्यवस्था में है और वे आगे भी अपने अधिकारों एवं जनहित से जुड़े विषयों को कानूनी एवं लोकतांत्रिक तरीके से उठाते रहेंगे
इस प्रकार 24 सितंबर 2026 का यह आदेश वर्तमान स्थिति में 19 जून 2026 को इकबाल छीपा को पद से हटाने वाले आदेश को निरस्त करने वाला न्यायिक आदेश है।