वास्तुदोष नहीं होता तो आमेर के बजाय भानगढ़ होता राजवंश की राजधानी’

वास्तुदोष नहीं होता तो आमेर के बजाय भानगढ़ होता राजवंश की राजधानी’
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अलवर | भारतीय ज्योतिष विज्ञान परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं वास्तु अकादमी जयपुर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पंडित सतीश शर्मा का कहना है कि भानगढ़ में वास्तुदोष नहीं होता तो आमेर नहीं बल्कि वही राजवंश की राजधानी हो सकता था। रविवार को पाराशर धाम में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला के दौरान भानगढ़ के भ्रमण के दौरान उन्होंने प्रतिभागियों और शोधार्थियों को पंडित शर्मा ने यह जानकारी दी। कार्यशाला में देश के विभिन्न भागों से आए 100 से अधिक प्रशिक्षणार्थियों व शोधार्थियों ने भाग लिया।
भानगढ़ के किले की वास्तु स्थिति देखकर वास्तुविद पंडित शर्मा ने कहा कि किले के संपूर्ण रूप से नष्ट होने का कारण इसका वास्तु दोष है। इस किले की भूमि गज पृष्ठ होने के बजाए दैत्य पृष्ठ की है। किले का महेंद्र
द्वार भी अभनांश शुद्धि की गणना किए बिना गलत स्थिति में स्थापित कर दिया गया। मुख्य द्वार भी इंद्रदेव के स्थान पर है परंतु जयंत द्वार। नहीं खुला होने के कारण शासकों के पास धन का अभाव रहा। दक्षिण में खाली स्थान के साथ पानी का कुंड और निरंतर बहने वाला झरना इत्यादि दोषों के कारण यह साम्राज्य अधिक नहीं चल पाया। इन वास्तुदोषों को उन्होंने सिंधु सेवड़ा व और रानी रत्नावती की घटना व श्राप का कारण बताया। इसके बाद पाराशर धाम में हुई कार्यशाला में उन्होंने ज्योतिषीय महत्व की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि महर्षि पाराशर ने ब्रह्मांड की गति व स्थिति का अध्ययन कर ज्योतिष के प्रथम प्रमाणिक ग्रंथ पाराशर होराशास्त्र की रचना की। उन्होंने राहु ग्रह की महत्ता के बारे में भी बताया और अन्य जानकारियां भी दी।

Vijay Kumar Parashar

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