अजमेर डेयरी अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी को हाईकोर्ट से बड़ी राहत: संचालक मंडल भंग करने पर रोक, 15 मई तक यथास्थिति के आदेश
अजमेर डेयरी अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी को हाईकोर्ट से बड़ी राहत: संचालक मंडल भंग करने पर रोक, 15 मई तक यथास्थिति के आदेश
अजमेर/जयपुरः राजस्थान उच्च न्यायालय ने अजमेर डेयरी और देवास दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति के निर्वाचित संचालक मंडल को भंग कर प्रशासक लगाने की राज्य सरकार की मंशा पर पानी फेरते हुए एक बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने अजमेर डेयरी अध्यक्ष श्री रामचंद्र चौधरी को बड़ी राहत देते हुए संचालक मंडल को भंग करने पर रोक लगा दी है और आगामी 15 मई तक ‘यथास्थिति’ (Status Quo) बनाए रखने के आदेश दिए हैं।
समय पर चुनाव नहीं करवाकर प्रशासक थोपना चाहती थी सरकार श्री रामचंद्र चौधरी एवं साथी संचालक मंडल की ओर से जनवरी माह में हाईकोर्ट में रिट याचिका (संख्या 1109/26 एवं 1107/26) दायर की गई थी। याचिका में यह बताया गया था कि राज्य सरकार से पिछले 6 महीनों से बार-बार चुनाव कराने का अनुरोध किया जा रहा था, ताकि नवनिर्वाचित संचालक मंडल कार्यभार संभाल सके। लेकिन, सरकार ने जानबूझकर समय पर चुनाव नहीं कराए और इसके बजाय निर्वाचित बोर्ड को भंग कर प्रशासक नियुक्त करने की तैयारी कर ली।
न्यायालय में क्या हुआ?
राजस्थान हाईकोर्ट की कोर्ट संख्या 9 में माननीय न्यायाधीश श्री समीर जैन के समक्ष श्री रामचंद्र चौधरी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्री एम.एम. रंजन, सुश्री आयुषी जैन और श्री नरेश शर्मा ने मजबूती से पक्ष रखा। अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि सरकार लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन न करते हुए पिछले दरवाजे से प्रशासक लगाना चाहती है।
राज्य सरकार के अधिवक्ता ने इस मामले में जवाब पेश करने के लिए समय मांगा। इस पर माननीय न्यायाधीश ने सरकार को 15 मई तक का समय देते हुए सख्त हिदायत दी कि वर्तमान में कार्यरत दोनों संस्थाओं के संचालक मंडल को किसी भी सूरत में भंग नहीं किया जाए।
मुख्यमंत्री कार्यालय की बैठक के तथ्य भी कोर्ट में रखे गए
सुनवाई के दौरान अदालत के संज्ञान में यह भी लाया गया कि राज्य सरकार चुनाव टालने के साथ ही 20 अप्रैल 2026 को अपराह्न 12 बजे मुख्यमंत्री कार्यालय के संयुक्त सचिव के आदेश पर एक उच्च स्तरीय बैठक कर रही है। सहकारिता सचिव व रजिस्ट्रार (सहकारी समितियां, राजस्थान) की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में सदस्य के रूप में आरसीडीएफ (RCDF) की प्रबंध संचालक श्रीमती श्रुति भारद्वाज शामिल होगी। बैठक का अघोषित एजेंडा ‘निष्पक्ष चुनाव’ की आड़ में प्रदेश/जिले की दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों / जिला दुग्ध उत्पादक संघ के संचालक मण्डल को भंग कर निष्पक्ष चुनाव करवाने बाबत् था।
राज्यपाल ने भी दिए शीघ्र चुनाव के निर्देश
इस पूरे प्रकरण में माननीय राज्यपाल महोदय ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारी श्री समित शर्मा को डेयरी व समितियों के चुनाव अतिशीघ्र संपन्न कराने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
पूर्व में भी हाईकोर्ट दे चुका है ऐसे फैसलों पर दखल ज्ञात हो कि पूर्व में भी भंवरलाल शर्मा बनाम राज्य सरकार, सुल्ताना बनाम राज्य सरकार के मामले में हाईकोर्ट की डबल बेंच ने स्पष्ट किया था कि यदि सरकार अपनी नाकामी के कारण समय पर चुनाव नहीं करवा पाती है, तो वह संस्थाओं के बोर्ड भंग कर प्रशासक नहीं लगा सकती। उस समय भी न्यायालय ने प्रशासकों की नियुक्ति पर स्टे देकर पुराने बोर्ड को बहाल कर दिया था।
माननीय उच्च न्यायालय के इस फैसले से सहकारिता क्षेत्र से जुड़े लाखों किसानों और दुग्ध उत्पादकों में हर्ष की लहर है और इसे लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत माना जा रहा है। मामले की अगली सुनवाई अब 15 मई को होगी।