अजमेर केंद्रीय सहकारी बैंक लिमिटेड, अजमेर ने सहकारिता क्षेत्र में एक ऎतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए राजस्थान में नया कीर्तिमान स्थापित किया है
अजमेर केंद्रीय सहकारी बैंक ने रचा इतिहास
राज्य का पहला बैंक बना जिसकी सभी 208 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियां ईआरपी प्लेटफॉर्म पर पूर्णतः ऑनलाइन
अजमेर, । अजमेर केंद्रीय सहकारी बैंक लिमिटेड, अजमेर ने सहकारिता क्षेत्र में एक ऎतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए राजस्थान में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। बैंक ने अपने कार्यक्षेत्र की सभी 208 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पीएसीएस) को सफलतापूर्वक ई-पीएसीएस के रूप में विकसित कर भारत सरकार के एकीकृत ईआरपी सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म पर पूर्णतः ऑनलाइन संचालित कर दिया है।
बैंक के प्रबंध निदेशक श्री हरीश सवासिया ने बताया कि इस उपलब्धि के साथ अजमेर केंद्रीय सहकारी बैंक राजस्थान का पहला ऎसा केंद्रीय सहकारी बैंक बन गया है, जिसकी सभी चयनित पीएसीएस समितियां पूर्णतः डिजिटल एवं ईआरपी प्रणाली से जुड़ चुकी हैं। यह कदम सहकारिता क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
उन्होंने बताया कि अजमेर केंद्रीय सहकारी बैंक वर्ष 1910 में स्थापित हुआ था और पिछले 116 वर्षों से किसानों एवं ग्रामीण समुदाय की सेवा में निरंतर कार्यरत है। बैंक का पंजीकरण 14 फरवरी 1910 तथा विधिवत स्थापना 20 अप्रैल 1910 को हुई थी। वर्ष 1953 से 1958 तक बैंक ने अजमेर स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक के रूप में राज्य के शीर्ष सहकारी बैंक की भूमिका भी निभाई। आज यह राजस्थान का पहला सहकारी बैंक है जिसने शताब्दी वर्ष पूर्ण कर एक सशक्त एवं विश्वसनीय वित्तीय संस्था के रूप में अपनी पहचान बनाए रखी है।
भारत सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना का सफल क्रियान्वयन
भारत सरकार द्वारा नाबार्ड के माध्यम से संचालित पीएसीएस कम्प्यूटरीकरण परियोजना के तहत देशभर की ग्राम सेवा सहकारी समितियों को एकीकृत ईआरपी प्रणाली से जोड़ा जा रहा है। राजस्थान में इस परियोजना के अंतर्गत कुल 6781 समितियों का चयन किया गया है, जिनमें से 208 समितियां अजमेर केंद्रीय सहकारी बैंक के कार्यक्षेत्र (अजमेर एवं ब्यावर जिले) की हैं। इन सभी समितियों का सफलतापूर्वक ऑनलाइन रूपांतरण पूर्ण कर लिया गया है।
किसानों एवं सहकारी समितियों को मिलेंगे व्यापक लाभ
ईआरपी आधारित डिजिटल प्रणाली से किसानों एवं सहकारी समितियों को अनेक लाभ प्राप्त होंगे, जिनमें फसल योजना एवं प्रबंधन, बीज, उर्वरक, कीटनाशक एवं कृषि उपकरणों का सुव्यवस्थित रिकॉर्ड, आय-व्यय एवं बजट का बेहतर नियंत्रण, समिति कर्मिक प्रबंधन, बिक्री एवं वितरण प्रणाली का प्रभावी संचालन तथा वास्तविक समय डेटा के आधार पर त्वरित एवं बेहतर निर्णय लेने की क्षमता शामिल है। इसके साथ ही पैक्स स्तर पर रिकॉर्ड संधारण एवं रिपोर्टिंग प्रक्रिया भी पूरी तरह स्वचालित हो जाएगी।
बैंक प्रबंध निदेशक श्री हरीश सवासिया ने कहा कि यह उपलब्धि डिजिटल सहकारिता की दिशा में एक ऎतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा कि यह सफलता बैंक, पीएसीएस समितियों के कर्मचारियों तथा किसानों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सक्षम एवं तकनीक-सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।