परियोजना सिंघला बांध को केवल सीमित दृष्टिकोण से न देखें। यह परियोजना आने वाली पीढ़ियों, किसानों के भविष्य, जल संरक्षण और क्षेत्र के समग्र विकास की आधारशिला है
सिंघला बांध परियोजना के संबंध में मेरी विनम्र अपील
पिछले 8–10 दिनों से ग्राम पंचायत थल के किसान भाई सिंघला बांध परियोजना को लेकर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। यह विषय अत्यंत संवेदनशील है और इससे अनेक किसानों की भावनाएँ जुड़ी हुई हैं।
मैं राजस्थान के यशस्वी मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा , जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत तथा इस परियोजना को आगे बढ़ाने में सहयोग देने वाले सभी जनप्रतिनिधियों का हृदय से अभिनंदन करता हूँ। विशेष रूप से माननीय जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत जी ने जिस समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ भागीरथ प्रयास करते हुए सिंघला बांध तक जल पहुँचाने की दिशा में कार्य किया है, वह निश्चित रूप से सराहनीय है।
साथ ही धरना-स्थल पर बैठे मेरे सभी किसान भाइयों से भी मेरा हाथ जोड़कर विनम्र निवेदन है कि अपनी जायज़ मांगों को पूरी शालीनता, धैर्य और लोकतांत्रिक मर्यादा के साथ रखें। किसी भी व्यक्ति के प्रति अमर्यादित भाषा, कटु व्यवहार या टकराव का रास्ता न अपनाएँ। संवाद और संयम ही किसी भी समस्या का सबसे प्रभावी समाधान है।
सिंघला बांध परियोजना केवल एक गांव या कुछ किसानों की परियोजना नहीं है, बल्कि रूपनगढ़ सहित आसपास के लगभग 50 गांवों तथा जयपुर जिले के सांभर क्षेत्र तक के हजारों किसानों के भविष्य से जुड़ी एक ऐतिहासिक सिंचाई परियोजना है। इसके पूर्ण होने से रूपनगढ़ की बंजर भूमि सिंचित होगी, भूजल स्तर में उल्लेखनीय सुधार होगा, किसानों की आय बढ़ेगी, खेती को नया जीवन मिलेगा और पूरे क्षेत्र में विकास एवं खुशहाली का नया दौर शुरू होगा।
इसके साथ ही यह भी उतना ही आवश्यक है कि जिन किसानों की भूमि इस परियोजना से प्रभावित हो रही है, उनके साथ पूर्ण न्याय किया जाए। किसान दिन-रात अथक परिश्रम करके धरती का सीना चीरकर अन्न पैदा करता है। कड़ाके की सर्दी हो, भीषण गर्मी हो या बरसात—वह अपने खेतों की रखवाली करता है ताकि देश का अन्न भंडार भरा रहे। इसलिए किसान की पीड़ा, उसके अधिकार और उसके सम्मान की रक्षा करना हम सभी का नैतिक दायित्व है।
मेरा राजस्थान सरकार से विनम्र आग्रह है कि यदि किसी भी प्रभावित किसान को अभी तक उचित मुआवजा प्राप्त नहीं हुआ है, तो उसे वर्तमान प्रचलित दरों के अनुसार न्यायपूर्ण एवं सम्मानजनक मुआवजा दिया जाए, ताकि किसी भी किसान के साथ अन्याय न हो।
साथ ही मेरा उन सभी भाइयों से भी निवेदन है, जिन्होंने पूर्व में मुआवजा, पुनर्वास अथवा सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए भूखंडों सहित अन्य सुविधाओं का लाभ प्राप्त किया है, वे इस विषय को विवाद या राजनीति का रूप न दें। मुझे पूर्ण विश्वास है कि जिस प्रकार पूर्व में प्रभावित परिवारों के हितों का ध्यान रखा गया था, उसी प्रकार वर्तमान सरकार भी किसी भी किसान के साथ अन्याय नहीं होने देगी।
मैं क्षेत्र के सभी जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, किसान नेताओं और आमजन से भी आग्रह करता हूँ कि इस परियोजना को केवल सीमित दृष्टिकोण से न देखें। यह परियोजना आने वाली पीढ़ियों, किसानों के भविष्य, जल संरक्षण और क्षेत्र के समग्र विकास की आधारशिला है। हमारा प्रयास ऐसा होना चाहिए कि न किसी किसान का नुकसान हो और न ही क्षेत्र के विकास का मार्ग रुके।
आइए, हम सब मिलकर संवाद, संवेदनशीलता और सकारात्मक सोच के साथ ऐसा समाधान निकालें, जिसमें किसान का सम्मान भी सुरक्षित रहे, उसे न्याय भी मिले और सिंघला बांध परियोजना से पूरे क्षेत्र में हरियाली, समृद्धि और खुशहाली का नया इतिहास लिखा जाए।
– इकबाल छीपा पूर्व सरपंच एवं पूर्व
एवं पूर्व प्रशासक ग्राम पंचायत रूपनगढ़
अजमेर विधानसभा पुष्कर