रामसर में बनेगा देश का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, बकरियों की नस्ल सुधार को मिलेगी नई दिशा
रामसर में बनेगा देश का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, बकरियों की नस्ल सुधार को मिलेगी नई दिशा
अजमेर। नसीराबाद के निकट रामसर स्थित गोट सीमन प्रयोगशाला को राष्ट्रीय स्तर के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके तहत प्रयोगशाला का आधुनिकीकरण कर उच्च आनुवंशिक गुणवत्ता वाली बकरियों की नस्ल सुधार, वैज्ञानिक सीमन उत्पादन और पशुपालकों की आय बढ़ाने की दिशा में काम किया जाएगा।
रामसर फार्म के प्रस्तावित मॉडल का उच्चस्तरीय विशेषज्ञ दल ने निरीक्षण कर तकनीकी पहलुओं की समीक्षा की। इस दौरान पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान एवं गो-अनुसंधान विश्वविद्यालय, मथुरा के डीन डॉ. मुकुल आनंद, राजस्थान पशुधन विकास बोर्ड जयपुर के अतिरिक्त निदेशक डॉ. प्रीतपाल कालरा सहित पशु चिकित्सा विशेषज्ञों एवं राज्य कृषि विपणन बोर्ड के अभियंताओं ने प्रस्तावित परियोजना का अवलोकन किया।
पशुपालन विभाग के अतिरिक्त निदेशक (क्षेत्र) डॉ. नवीन परिहार ने बताया कि रामसर फार्म को देश में गोट सीमन उत्पादन एवं नस्ल सुधार के क्षेत्र में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए आवश्यक तैयारियां शीघ्र शुरू की जाएंगी। प्रारंभिक चरण में मथुरा स्थित विशेषज्ञ प्रयोगशाला से सीमन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।
आधुनिक तकनीक से होगा सीमन संग्रहण
प्रस्तावित परियोजना में उच्च आनुवंशिक गुणवत्ता वाले बकरों से वैज्ञानिक पद्धति से सीमन संग्रहण तथा फ्रोजन सीमन के सुरक्षित भंडारण के लिए अत्याधुनिक लैब विकसित की जाएगी। सीमन कलेक्शन सेंटर और सीमन स्टोर का वैज्ञानिक प्रबंधन इस परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।
बकरों के लिए विकसित होगा आधुनिक हाउसिंग एरिया
परियोजना के तहत उच्च गुणवत्ता वाले बकरों के लिए सर्वसुविधायुक्त हाउसिंग एरिया बनाया जाएगा। इसके साथ प्राकृतिक वातावरण में चरने के लिए खुला क्षेत्र तथा नियमित व्यायाम और आवागमन के लिए अलग ओपन स्पेस भी विकसित किया जाएगा।
चारा प्रसंस्करण और भंडारण की सुविधा
फार्म में आधुनिक चारा प्रसंस्करण एवं स्टोरेज यूनिट स्थापित की जाएगी। इसमें मशीनों से घास एवं चारे की कटाई तथा साइलेज और ड्राई फोडर के सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था रहेगी।
नवजात बच्चों की भी होगी वैज्ञानिक निगरानी
बकरियों एवं उनके नवजात बच्चों के वैज्ञानिक प्रबंधन, स्वास्थ्य निगरानी और समुचित देखभाल के लिए विशेष हैंडलिंग पेन बनाए जाएंगे। इससे पशुओं की बेहतर देखभाल के साथ नस्ल सुधार कार्यक्रम को भी व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जा सकेगा।
विशेषज्ञों ने प्रस्तावित मॉडल की सराहना करते हुए इसे नस्ल सुधार, उच्च गुणवत्ता वाले सीमन उत्पादन और पशुपालकों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। निरीक्षण के बाद तकनीकी अधिकारियों एवं विशेषज्ञों ने परियोजना के संचालन, सीमन संग्रहण, भंडारण और पशु प्रबंधन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।
समीक्षा बैठक में राजस्थान पशुधन विकास बोर्ड के डॉ. मनीष, डॉ. महेश, डॉ. अनूप, डॉ. पूजा सहित पशु चिकित्सा विशेषज्ञ तथा राज्य कृषि विपणन बोर्ड की अधिशासी अभियंता श्रीमती शशिकला, राम प्रकाश मीणा, सहायक अभियंता नरेंद्र एवं कनिष्ठ अभियंता जितेंद्र सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।