फार्मर आईडी बनेगी किसानों की डिजिटल पहचान, जमीन से लेकर सरकारी योजनाओं तक जुड़ेंगे रिकॉर्ड
जयपुर। राजस्थान में अब किसानों की पहचान केवल कागजी दस्तावेजों और अलग-अलग विभागों में दर्ज रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रहेगी। राज्य सरकार किसानों के लिए फार्मर आईडी को डिजिटल पहचान के रूप में विकसित कर रही है, जिसके माध्यम से किसान की जमीन, फसल, खाद वितरण और विभिन्न सरकारी योजनाओं से जुड़े रिकॉर्ड को एक ही डिजिटल सिस्टम से जोड़ा जाएगा।
सरकार की तैयारी है कि भविष्य में किसानों से संबंधित विभिन्न सरकारी योजनाओं में फार्मर आईडी को अनिवार्य किया जाए। इससे अलग-अलग विभागों में उपलब्ध किसान संबंधी जानकारी को एकीकृत करने और योजनाओं का लाभ पात्र किसानों तक पहुंचाने में सुविधा होगी।
31 अगस्त तक डेटा सिंक्रोनाइजेशन का लक्ष्य
किसान रजिस्ट्री और आरओआर (रिकॉर्ड ऑफ राइट्स) के बीच डेटा सिंक्रोनाइजेशन का काम तेजी से किया जा रहा है। इस प्रक्रिया को 31 अगस्त 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
डेटा सिंक्रोनाइजेशन पूरा होने के बाद किसान रजिस्ट्री और भूमि रिकॉर्ड से जुड़े दोनों सिस्टम के बीच नियमित रूप से डेटा का आदान-प्रदान हो सकेगा। इससे जमीन के स्वामित्व और किसान से संबंधित जानकारी को डिजिटल रूप से अपडेट रखने में मदद मिलेगी।
एक ही सिस्टम से जुड़ेगी कई जानकारियां
फार्मर आईडी के माध्यम से किसान की प्रमुख जानकारियों को डिजिटल रूप से जोड़ने की योजना है। इनमें शामिल हैं—
- किसान की जमीन और स्वामित्व से जुड़े रिकॉर्ड
- फसल से संबंधित जानकारी
- खाद वितरण का विवरण
- सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी
- किसान रजिस्ट्री और भूमि रिकॉर्ड का डेटा
सरकार की इस पहल से किसानों के लिए डिजिटल रिकॉर्ड आधारित व्यवस्था को मजबूत करने और कृषि से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन को अधिक सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।