यूसीसी विधानसभा में पेश: विवाह पंजीयन अनिवार्य, जानकारी छिपाने पर 2 साल तक जेल
जयपुर। राजस्थान विधानसभा में शुक्रवार को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पेश किया गया। विधेयक में विवाह पंजीयन, लिव-इन रिलेशनशिप, भरण-पोषण और पारिवारिक मामलों को लेकर कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। कानून लागू होने के बाद राज्य में सभी विवाहों का पंजीयन अनिवार्य होगा, जबकि विवाह पंजीयक को गलत या अधूरी जानकारी देने अथवा जानकारी छिपाने पर दो साल तक की जेल या 10 हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।
विधेयक के अनुसार, राजस्थान में उन्हीं दंपतियों का विवाह पंजीयन हो सकेगा, जिनमें पति या पत्नी में से कम से कम एक राजस्थान का निवासी हो। यदि विवाह राज्य के बाहर हुआ है, तो पति या पत्नी में से किसी एक के क्षेत्राधिकार में विवाह का पंजीयन कराया जा सकेगा।
17 साल पुराने विवाह पंजीयन कानून की होगी विदाई
यूसीसी लागू होने के साथ ही राज्य में करीब 17 साल पुराने अनिवार्य विवाह पंजीयन से संबंधित कानून की जगह नई व्यवस्था लागू होगी। विधेयक में शामिल पारिवारिक मामलों को पारिवारिक न्यायालयों के दायरे में लाने का प्रावधान किया गया है।
विधेयक के अनुसार, यूसीसी के दायरे में आने वाले विषयों पर विभिन्न पर्सनल लॉ और अन्य धार्मिक कानून लागू नहीं होंगे। इनमें विवाह, उत्तराधिकार और भरण-पोषण से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं।
लिव-इन रिलेशनशिप का भी कराना होगा पंजीयन
विधेयक में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी सख्त प्रावधान किए गए हैं। लिव-इन संबंध में रहने वाले जोड़ों के लिए पंजीयन अनिवार्य होगा। पंजीयन से इनकार किए जाने की स्थिति में संबंधित पक्ष 30 दिन के भीतर अपील कर सकेगा।
किसी व्यक्ति को लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के लिए जबरन मजबूर करने पर पांच साल तक की जेल का प्रावधान किया गया है। वहीं, विवाहित व्यक्ति के लिव-इन रिलेशनशिप में रहने पर भी पांच साल तक की सजा हो सकती है।
महिला को मिलेगा भरण-पोषण का अधिकार
विधेयक में प्रत्येक विवाहित महिला को भरण-पोषण का अधिकार देने का प्रावधान किया गया है। लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिला को भी भरण-पोषण पाने का अधिकार होगा। बच्चों से जुड़े मामलों का निस्तारण 60 दिन के भीतर करने का प्रावधान रखा गया है।
रक्त संबंधियों के बीच विवाह मान्य नहीं
नई व्यवस्था में रक्त संबंधियों के बीच विवाह को वैध नहीं माना जाएगा। सौतेले संबंधों और परिवार तथा ननिहाल पक्ष के निर्धारित निकट रक्त संबंधियों के बीच विवाह पर भी रोक का प्रावधान किया गया है।
ऑनलाइन पंजीयन के लिए बनेगा अलग पोर्टल
विवाह और लिव-इन पंजीयन की प्रक्रिया को डिजिटल बनाने के लिए अलग ऑनलाइन पोर्टल विकसित किया जाएगा। विवाह पंजीयक के आदेश या कार्रवाई के खिलाफ 30 दिन के भीतर अपील की जा सकेगी।
यदि विवाह पंजीयक अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करता है तो उस पर 25 हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। हालांकि, केवल पंजीयन नहीं होने के आधार पर किसी विवाह को अवैध नहीं माना जाएगा।
एक नजर में प्रमुख प्रावधान
- सभी विवाहों का पंजीयन अनिवार्य।
- गलत जानकारी देने या जानकारी छिपाने पर 2 साल तक जेल या 10 हजार रुपए तक जुर्माना।
- पति या पत्नी में से कम से कम एक का राजस्थान से संबंध आवश्यक।
- विवाह पंजीयन नहीं होने से विवाह अवैध नहीं होगा।
- लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीयन भी अनिवार्य।
- विवाहित व्यक्ति के लिव-इन में रहने पर 5 साल तक की सजा का प्रावधान।
- किसी को जबरन लिव-इन संबंध में रखने पर 5 साल तक जेल।
- विवाहित और लिव-इन संबंध में रहने वाली महिला को भरण-पोषण का अधिकार।
- बच्चों से जुड़े मामलों का 60 दिन में निस्तारण।
- पंजीयन और प्रक्रिया के लिए अलग ऑनलाइन पोर्टल बनाया जाएगा।