खेती में एआई की एंट्री: किसान की जरूरत पहचानेगा सिस्टम, विभाग देगा सटीक समाधान
जयपुर। राजस्थान में कृषि प्रशासन को अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डेटा आधारित तकनीक से जोड़ने की तैयारी शुरू हो गई है। कृषि विभाग ने इस दिशा में अधिकारियों को एआई के उपयोग का प्रशिक्षण भी दिया है। विभाग का लक्ष्य एआई को केवल प्रशासनिक कार्यों तक सीमित रखने के बजाय किसान केंद्रित सेवा व्यवस्था के रूप में विकसित करना है।
नई व्यवस्था में किसान की जरूरत और उसकी प्रोफाइल के आधार पर अधिक सटीक और लक्षित समाधान उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। भविष्य में किसानों को फसल, मौसम, कीट एवं रोग से संबंधित जानकारी और कृषि समस्याओं के समाधान अधिक तेजी से मिल सकेंगे।
किसान रहेगा पूरी व्यवस्था के केंद्र में
कृषि विभाग एआई आधारित व्यवस्था को किसान केंद्रित बनाने पर जोर दे रहा है। इसके तहत किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार फसल और मौसम संबंधी सलाह, कीट एवं रोग की पहचान, कृषि समस्याओं के समाधान और सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने की संभावनाएं विकसित की जा रही हैं।
विभाग का उद्देश्य एआई को केवल प्रशिक्षण या प्रयोग तक सीमित नहीं रखना है, बल्कि इसे कृषि प्रशासन और किसानों तक सेवाएं पहुंचाने की व्यवस्था से जोड़ना है।
किसान की प्रोफाइल के आधार पर मिलेगा समाधान
विभाग ऐसी संस्थागत व्यवस्था विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है, जिसमें किसान की प्रोफाइल और उसकी जरूरतों के आधार पर सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें। आगे चलकर एआई के माध्यम से किसानों को वन-टू-वन सेवा देने की व्यवस्था भी विकसित की जा सकती है।
कृषि से जुड़े डेटा के विश्लेषण के आधार पर फसल, मौसम, कीट-रोग और उत्पादन से संबंधित पूर्वानुमान तैयार किए जाएंगे। साथ ही किसानों और कृषि प्रशासन के लिए निर्णय लेने में मदद करने वाली प्रणाली विकसित करने पर भी काम किया जा रहा है।
एआई आधारित नवाचारों को मिलेगा बढ़ावा
कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल के अनुसार कृषि क्षेत्र में एआई आधारित नवाचारों, परियोजनाओं और तकनीकी समाधानों को एकीकृत करने की प्रक्रिया पर काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य कृषि क्षेत्र में उपलब्ध डेटा का बेहतर उपयोग कर किसानों तक अधिक प्रभावी और जरूरत आधारित सेवाएं पहुंचाना है।
एक नजर में
- कृषि प्रशासन में एआई और डेटा आधारित तकनीक की एंट्री।
- कृषि विभाग के अधिकारियों को एआई उपयोग का प्रशिक्षण।
- किसान की जरूरत और प्रोफाइल के आधार पर विकसित होगी सेवा व्यवस्था।
- फसल और मौसम संबंधी लक्षित सलाह देने की तैयारी।
- एआई से कीट एवं रोग की पहचान और समाधान में मदद।
- कृषि डेटा से फसल, मौसम और उत्पादन के पूर्वानुमान तैयार होंगे।
- भविष्य में किसानों को एआई के जरिए वन-टू-वन सेवा देने की योजना।