झालावाड़ हादसे पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जताया शोक, कहा—पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है राज्य सरकारमासूमों की मौत से व्यथित सीएम ने दिए उच्चस्तरीय जांच के आदेश
जयपुर/झालावाड़, प्रतीक पाराशर।
झालावाड़ जिले के मनोहरथाना क्षेत्र के पिपलोदी गांव स्थित एक सरकारी विद्यालय में बुधवार को हुई छत गिरने की घटना से समूचा प्रदेश शोकाकुल है। इस हादसे में अब तक 7 मासूम बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि 34 से अधिक बच्चे घायल बताए जा रहे हैं।
घटना पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे “दर्दनाक और हृदयविदारक” बताया। उन्होंने कहा, “इस दुर्भाग्यपूर्ण हादसे में मासूम बच्चों की मृत्यु से मन अत्यंत व्यथित है। राज्य सरकार दुख की इस घड़ी में पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है। मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि दिवंगत आत्माओं को शांति और उनके परिजनों को यह असहनीय पीड़ा सहन करने की शक्ति मिले।”
मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने प्रशासन को घायलों के सर्वोत्तम उपचार के निर्देश दिए हैं और डॉक्टर्स व अधिकारियों से लगातार संपर्क में हैं। साथ ही शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को तत्काल घटनास्थल पर भेजकर स्थिति का जायजा लेने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे व झालावाड़-बारां सांसद दुष्यंत सिंह से भी उनकी बातचीत हुई है। दोनों नेता शीघ्र ही घटनास्थल का दौरा करेंगे।
मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार समय-समय पर सभी सरकारी विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों और भवनों की मरम्मत के निर्देश संबंधित विभागों को देती रही है। फिर भी ऐसी घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि राज्य में कोई भी स्कूल भवन जर्जर स्थिति में न रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि “इस हादसे में जिन्होंने अपने नन्हें बच्चों को खोया है, उनकी क्षति की भरपाई संभव नहीं है, परंतु हम उन्हें न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
मुख्यमंत्री ने हादसे की उच्चस्तरीय जांच के आदेश देते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की घोषणा की है। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि भविष्य में ऐसे हादसे न हों, इसके लिए ठोस और समयबद्ध कदम उठाए जाएंगे।
हादसे की स्थिति:
जानकारी के अनुसार, मृतकों में 4 बच्चे मनोहरथाना के और 3 झालावाड़ क्षेत्र के निवासी हैं। घायल बच्चों में से 12 का इलाज झालावाड़, और 9 का मनोहरथाना अस्पताल में चल रहा है। 6 बच्चों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है।
यह हादसा जहां प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर सवाल खड़ा करता है, वहीं यह संकेत भी देता है कि जर्जर भवनों की मरम्मत और स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जमीनी स्तर पर और अधिक सतर्कता की आवश्यकता है।