भारी बारिश से कई गांवों का आपस में सड़क संपर्क टूटा।


मवेशियों के मरने से पशुपालक सकते में।
एक सप्ताह से बाजार में की दुकानें बंद, सब्जी मंडी में व्यवसाय समाप्त।
शाहपुरा 6 सितंबर2025। कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश को लेकर क्षेत्र के हालत दिनों दिन नासाज होते जा रहे है। कई गांव, ढाणी टापू में तब्दील होते दिखाई से रहे है। जलभराव से था नाले उफान पर होने से कई गांवों का आपस में सड़क संपर्क कट चुका है। वहीं बचखेड़ा पंचायत क्षेत्र में एक गांव में विगत 30 घंटे बिजली बंद रहने से ग्रामीण परेशान रहे।
इन हालातों के चलते क्षेत्र में कई मवेशियों की मौत हो गई, कई कच्चे मकान ढह गए, कई झरझर मकान ढहने की कगार पर है। नगर में जलभराव के कारण व्यवसाई पानी भरने के कारण अपनी दुकान नहीं खोल पा रहे है, वहीं सब्जी मंडी, त्रिमूर्ति सर्किल, रामद्वारा रोड, पुरानी सब्जी मंडी में लगातार पानी बहने तथा भराव के कारण सब्जी व फल विक्रेता अपना व्यवसाय नहीं कर पा रहे है। जिस कारण घरों की रसोई में रोजमर्रा उपभोग में काम आने वाली सब्जियों की किल्लत होने से परेशानी हो रही है। आसपास के सब्जी बागानों में पानी भरने से सब्जियों के दाम आसमान छूने लगे है।
ईटमारिया के ग्राम पंचायत बंजारों खेड़ा में क्षेत्र में शुक्रवार रात्रि से ही आसमान ने जमकर कहर बरपाया। प्रभावित परिवारों के मकान ध्वस्त तेजपाल बंजारा ने बताया कि करीब रात आठ बजे शुरू हुई मूसलाधार बारिश के कारण सरदार, तेजपाल, गोरु, महेंद्र, भैरू और प्रकाश बंजारा के पांच कच्चे मकान ढह गए। कई मकानों में दरारें आगई। गनीमत रही कि हादसे के समय सभी परिवारजन नींद से जाग चुके थे और सुरक्षित बाहर निकल गए इस वजह से किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। लेकिन अचानक मकानों के ध्वस्त होने से पूरा इलाका दहशत में आ गया। लोगों में भय और चिंता का माहौल व्याप्त हो गया है। अधिकारी सचिव शंकर मीणा पटवारी आशाराम मीणा ने शनिवार को मौका देखा। ग्रामीणों ने प्रशासनिक अधिकारियों से प्रभावित परिवारों को राहत दिलाने के साथ मुआवजा के तौर पर मदद दिलाने की मांग की।
मवेशियों की मौत से पशुपालक सकते में:- सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अतिवृष्टि के कारण दीवारें ढहने के कारण दर्जनों मवेशी मरने की जानकारी समाने आई। जिसे लेकर पशुपालक सकते में है। जिसमें अमरपुरा मदनपुरा, मिंडोलिया 4, शिवपुरी 3, बोरडा बावरियान 2, शाहपुरा के कहार मोहल्ले में 2 एवं क्षेत्र में ओर भी गांवों में मवेशी मरने के आंकड़े सामने रहे है। इसी तरह कच्चे मकान ढहने के आंकड़ों में भी प्रति दिन बढ़ोतरी होती जारही है।
