चुनाव आयोग की विश्वसनीयता बनाए रखना सभी दलों की जिम्मेदारी : भाजपा

चुनाव आयोग की विश्वसनीयता बनाए रखना सभी दलों की जिम्मेदारी : भाजपा
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अजमेर। भारतीय जनता पार्टी अजमेर शहर जिलाध्यक्ष रमेश सोनी, महापौर अनामिका शर्मा, उप महापौर हेमंत साखला, जिला मीडिया संयोजक विक्रम सिंह, अनीश मोयल एवं रचित कछावा ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को लेकर अपनी बात रखी।

भाजपा नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक दलों को सरकार की नीतियों और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने का अधिकार है, लेकिन निर्वाचन आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं के संबंध में लगाए जाने वाले आरोप तथ्यों और प्रमाणों पर आधारित होने चाहिए। उनके अनुसार, बिना पर्याप्त तथ्य के लगातार आरोप लगाए जाने से जनता के बीच भ्रम की स्थिति बन सकती है और संस्थाओं के प्रति विश्वास प्रभावित हो सकता है।

SIR को लेकर आयोग के स्पष्टीकरण का किया उल्लेख

भाजपा नेताओं ने 26 सितंबर को निर्वाचन आयोग की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि आयोग के अनुसार Special Intensive Revision (SIR) सहित प्रमुख निर्णय आयोग की सर्वसम्मत स्वीकृति से लिए गए। नेताओं ने कहा कि 24 जून 2025 के SIR आदेश और उसके बाद जारी कार्यक्रम भी आयोग की स्वीकृति से जारी हुए थे।

निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर वर्तमान में SIR-2026 से संबंधित मतदाता सेवाएं और दस्तावेज उपलब्ध हैं।

भाजपा नेताओं ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन संस्थागत निर्णयों पर चर्चा तथ्यों और आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर होनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी किया उल्लेख

प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा नेताओं ने बिहार में SIR से संबंधित मामले में सुप्रीम कोर्ट के 27 मई 2026 के निर्णय का भी उल्लेख किया। सुप्रीम कोर्ट के आधिकारिक सारांश के अनुसार मामला बिहार में मतदाता सूची के Special Intensive Revision की वैधता और निर्वाचन आयोग की शक्तियों से संबंधित था।

रमेश सोनी ने कहा कि न्यायपालिका और निर्वाचन आयोग जैसे संस्थानों के निर्णयों पर राजनीतिक चर्चा हो सकती है, लेकिन जनता के सामने संवाद तथ्यात्मक और जिम्मेदारीपूर्ण होना चाहिए।

कैबिनेट सेक्रेटरी को भेजे पत्र का भी मुद्दा उठाया

भाजपा नेताओं ने कहा कि निर्वाचन आयोग के अनुसार दो निर्वाचन आयुक्तों द्वारा कैबिनेट सेक्रेटरी को भेजे गए पत्र किसी नीतिगत निर्णय अथवा आयोग के IT प्रभाग से संबंधित नहीं थे, बल्कि प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी की कार्यप्रणाली से जुड़े प्रशासनिक विषय थे।

उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशासनिक पत्रों को SIR की नीति अथवा चुनाव प्रक्रिया से जोड़ने से पहले संबंधित दस्तावेजों और आयोग के स्पष्टीकरण को देखा जाना चाहिए।

फॉर्म-6 को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने की बात

भाजपा नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए फॉर्म-6 की प्रक्रिया को लेकर भी भ्रम की स्थिति नहीं होनी चाहिए। निर्वाचन आयोग के वर्तमान पोर्टल पर नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए Form-6 उपलब्ध है।

उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है कि पात्र मतदाताओं को सही प्रक्रिया की जानकारी उपलब्ध कराएं।

रमेश सोनी ने कहा—संस्थाओं की गरिमा लोकतंत्र की साझा जिम्मेदारी

रमेश सोनी ने कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता लोकतंत्र की साझा पूंजी है। उन्होंने कहा कि यदि किसी राजनीतिक दल को निर्वाचन आयोग या SIR को लेकर गंभीर आपत्ति है तो संबंधित तथ्य, दस्तावेज और प्रमाण भी सार्वजनिक किए जाने चाहिए।

महापौर अनामिका शर्मा एवं उप महापौर हेमंत साखला ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति जनता का विश्वास मजबूत रहना आवश्यक है। जिला मीडिया संयोजक विक्रम सिंह ने कहा कि SIR, Form-6 और प्रशासनिक पत्रों से जुड़े विषयों पर जनता के सामने आधिकारिक तथ्यों को स्पष्ट रूप से रखा जाना चाहिए।

भाजपा नेताओं ने कहा कि राजनीतिक विरोध लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन चुनाव आयोग, न्यायपालिका और अन्य संवैधानिक संस्थाओं के संबंध में सार्वजनिक संवाद में तथ्य, दस्तावेज और जिम्मेदारी को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

admin - awaz rajasthan ki

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