डूंगरी डैम को लेकर टकराव तेज — तीन मंत्रियों की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस, ग्रामीणों की महापंचायत में उठा विस्थापन का दर्द

डूंगरी डैम को लेकर टकराव तेज — तीन मंत्रियों की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस, ग्रामीणों की महापंचायत में उठा विस्थापन का दर्द
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Jaipur (प्रतीक पाराशर )। डूंगरी डैम परियोजना को लेकर पिछले कुछ समय से जारी विवाद आज और गहराता दिखा। एक तरफ सरकार ने परियोजना को प्रदेश के जल प्रबंधन के लिए ‘गेमचेंजर’ बताया, वहीं दूसरी ओर प्रभावित ग्रामीणों ने सवाई माधोपुर में महापंचायत बुलाकर अपनी चिंता और विरोध खुलकर सामने रखा।

🔹 3 मंत्रियों की प्रेस कॉन्फ्रेंस — सरकार ने रखी अपनी बात

डैम मुद्दे पर शनिवार को प्रदेश सरकार के तीन मंत्रियों — डॉ. किरोड़ी लाल मीना, सुरेश सिंह रावत और जवाहर सिंह बेढम — ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की।

डॉ. किरोड़ी लाल मीना ने बताया कि परियोजना के चलते 9 गांवों की 70 से 100 प्रतिशत आबादी विस्थापित होगी, लेकिन सरकार पुनर्वास को लेकर पूरी तरह संवेदनशील है।
उन्होंने कहा —

“हर प्रभावित परिवार की जनसुनवाई की जाएगी। पुनर्वास, मुआवजा और अन्य सभी सहायता पारदर्शी तरीके से दी जाएगी। किसी को नुकसान में नहीं छोड़ा जाएगा।”

इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि

“कुछ तत्व ग्रामीणों को गुमराह कर आंदोलन को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं।”

मंत्री सुरेश सिंह रावत ने परियोजना को “अति-महत्वपूर्ण योजना” करार देते हुए कहा कि इससे राजस्थान के जल प्रबंधन को नई दिशा मिलेगी, और

“कालीसिंध व चंबल के पानी को बहकर व्यर्थ जाने के बजाय 17 जिलों में उपयोग किया जा सकेगा।”

मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा —

“कुछ लोग राजनीतिक फायदा उठाने के लिए किसानों के बीच बहरूपियों की तरह घूम रहे हैं।”

🔹 ग्रामीणों की महापंचायत — “गांव उजड़ेंगे, रोज़गार खत्म होगा”

सरकारी दावों के समानांतर दूसरी तस्वीर सवाई माधोपुर में देखने को मिली, जहां ग्रामीणों की विशाल महापंचायत आयोजित हुई।

ग्रामीणों का कहना है —

  • बांध बनने से गांव डूब क्षेत्र में आ जाएंगे
  • पीढ़ियों से बसी हुई आबादी उजड़ जाएगी
  • खेती-पशुपालन और आजीविका प्रभावित होगी

ग्रामीणों की मांग है कि
✔ जमीन-के-बदले जमीन मिले, सिर्फ मुआवजा नहीं
✔ पुनर्वास स्पष्ट और लिखित रूप में तय हो
✔ परियोजना तब तक आगे न बढ़े जब तक समाधान न मिले

🔹 “परियोजना बनाम विस्थापन” — दोनों पक्षों के तर्क तेज

सरकार का दावाग्रामीणों की चिंता
4,03,000 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगीखेती की जमीन पूरी तरह डूब क्षेत्र में जाएगी
उद्योगों को पानी मिलेगारोजगार और आजीविका खत्म होगी
17 जिलों में जल वितरण सुधरेगासामाजिक और सांस्कृतिक विस्थापन
पारदर्शी पुनर्वास व सहायता सुनिश्चितअभी तक स्पष्ट लिखित आश्वासन नहीं

🔸 आगे क्या?

सरकार परियोजना को लेकर सकारात्मक चित्र दिखा रही है, वहीं ग्रामीण बार-बार कह रहे हैं —

“विकास का स्वागत है, लेकिन हमारी कीमत पर नहीं।”

परियोजना का भविष्य अब सरकार और ग्रामीणों के बीच संवाद की गंभीरता पर निर्भर दिखाई देता है।

admin - awaz rajasthan ki

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