स्वायत्तशासी एवं पंचायती राज संस्थाओं के बकाया आक्षेपों, वसूली प्रकरणों तथा विभिन्न अंकेक्षण,ऑडिट अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वसूली से संबंधित सभी प्रकरणों में नियमानुसार त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित की जाए

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स्थानीय निधि अंकेक्षण विभाग
संभागीय प्रशासनिक समिति की बैठक आयोजित

अजमेर, 21 अप्रैल। स्थानीय निधि अंकेक्षण विभाग की संभागीय प्रशासनिक समिति की बैठक मंगलवार को संभागीय आयुक्त शक्ति सिंह राठौड़ की अध्यक्षता में संभागीय आयुक्त कार्यालय में आयोजित हुई। बैठक में संभाग की सभी स्वायत्तशासी एवं पंचायती राज संस्थाओं के बकाया आक्षेपों, वसूली प्रकरणों तथा विभिन्न अंकेक्षण प्रतिवेदनों की अनुपालना की विस्तार से समीक्षा की गई। अतिरिक्त संभागीय आयुक्त दीप्ती शर्मा ने आक्षेप निस्तारण के लिए मनोयोग से प्रयास करने के लिए कहा। अतिरिक्त निदेशक स्थानीय निधि अंकेक्षण विभाग ने संभाग की प्रगति तथा लंबित प्रकरणों की स्थिति से अवगत कराया।

संभागीय आयुक्त शक्ति सिंह राठौड़ ने कहा कि सुशासन की गुणवत्ता अंकेक्षण में परिलक्षित होती है तथा प्रभावी वित्तीय प्रबंधन के लिए नियमित ऑडिट अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वसूली से संबंधित सभी प्रकरणों में नियमानुसार त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित की जाए तथा इसके लिए अधिकारी स्वयं अतिरिक्त प्रयास करें। संस्थाओं के वित्तीय प्रबंधन को अधिक सुदृढ़ बनाते हुए राजकीय धन के उपयोग में पारदर्शिता, मितव्ययता एवं उत्तरदायित्व सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि बकाया सामान्य आक्षेपों, ए एवं बी श्रेणी आक्षेपों, गबन प्रकरणों तथा अन्य लंबित ऑडिट आक्षेपों का शीघ्र निस्तारण किया जाए। आक्षेपों के निस्तारण में स्पष्ट प्रगति दृष्टिगोचर होनी चाहिए। इसके लिए आवश्यकतानुसार विशेष शिविर एवं कैम्प आयोजित कर लंबित प्रकरणों का समाधान किया जाए। विभिन्न स्तरों पर लंबित वसूली प्रकरणों को गंभीरता से लेते हुए उनकी नियमित मॉनिटरिंग की जाए तथा अनुपालना रिपोर्ट समयबद्ध रूप से प्रेषित की जाए।

उन्होंने कहा कि अंकेक्षण प्रतिवेदनों की पालना के समय समस्त आवश्यक दस्तावेज संलग्न किए जाएं ताकि प्रकरणों का त्वरित निस्तारण संभव हो सके। कम प्रगति वाले कार्यालयों को प्राथमिकता के साथ लंबित आक्षेपों का समाधान करना चाहिए। ऐसे कार्यालयों की नियमित समीक्षा कर प्रति माह प्रगति की निगरानी की जाए। अधिकारियों को लेखा संबंधी नियमों, प्रक्रियाओं तथा वित्तीय अनुशासन के प्रति अद्यतन रहना चाहिए। इससे भविष्य में आक्षेपों की संभावना न्यूनतम हो सकेगी। श्री राठौड़ ने कहा कि सक्षम अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी से अंकेक्षण कार्यों में गुणवत्ता एवं गति दोनों सुनिश्चित होती हैं।

बैठक में संभाग की सभी स्वायत्तशासी संस्थाओं एवं पंचायती राज संस्थाओं के अधिकारी उपस्थित रहे।

Vijay Kumar Parashar

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