आवाज़ राजस्थान की – पंचायती राज चुनावी चर्चा कहीं 10-12 दिन में पहुंचता है पानी, तो कहीं टंकी बनने के दो साल बाद भी पाइपलाइन और कनेक्शन नहीं
जिला परिषद वार्ड-5: शहर के नजदीक गांव, फिर भी बुनियादी सुविधाओं का इंतजार
अजमेर। आवाज़ राजस्थान की की विशेष चुनावी श्रृंखला “पंचायती राज चुनावी चर्चा” के तहत जिला परिषद वार्ड-5 के ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं पर नजर डालें तो पेयजल, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और आबादी भूमि से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से सामने आते हैं। अजमेर शहर से सटे माकड़वाली, सोमलपुर, अजयसर-खरेखड़ी और हटूंडी पंचायत क्षेत्रों में ग्रामीण लंबे समय से इन समस्याओं के समाधान की मांग कर रहे हैं।
करीब 28,100 मतदाताओं वाले इस वार्ड में जिला परिषद चुनाव के बीच स्थानीय समस्याएं चर्चा का प्रमुख विषय हैं। क्षेत्र में भाजपा से अरुणा टांक, कांग्रेस से रजिया वाजिद चीता और निर्दलीय निजामुद्दीन चुनाव मैदान में हैं। ग्रामीणों की अपेक्षा है कि चुनाव के बाद उनकी समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
माकड़वाली: टंकी तैयार, लेकिन घरों तक नहीं पहुंचा पानी
माकड़वाली पंचायत क्षेत्र में पेयजल व्यवस्था प्रमुख समस्याओं में शामिल है। ग्रामीणों के अनुसार, हरिजन बस्ती के पास बनी पानी की टंकी करीब दो साल से तैयार है, लेकिन पाइपलाइन और घरेलू कनेक्शन नहीं होने से इसका पूरा लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पाया है।
क्षेत्र में बालिका शिक्षा को लेकर भी मांग उठ रही है। ग्रामीण चाहते हैं कि छठी से 12वीं तक की छात्राओं के लिए अलग बालिका विद्यालय खोला जाए, जिससे उन्हें पढ़ाई के लिए बेहतर सुविधाएं मिल सकें। माकड़वाली पंचायत क्षेत्र में करीब 8,000 मतदाता हैं।
लोहागल: 35 से अधिक कॉलोनियों में सड़क और स्ट्रीट लाइट की समस्या
माकड़वाली पंचायत के लोहागल क्षेत्र में 35 से अधिक कॉलोनियां हैं। शास्त्री नगर से जनाना तक मुख्य सड़क चौड़ी होकर डामरीकृत हो चुकी है, लेकिन अंदरूनी कॉलोनियों में अब भी कच्ची और क्षतिग्रस्त सड़कों की समस्या बनी हुई है।
अरावली नगर, ओंकार नगर, जैथमल नगर, तेली बस्ती और जीवन मंदिर सहित कई कॉलोनियों में गड्ढों से होकर गुजरना पड़ता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ कॉलोनियां 20 साल से भी अधिक पुरानी हैं, लेकिन वहां सड़क और स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाओं का अभाव है।
पेयजल की स्थिति भी चिंताजनक बताई जा रही है। कुछ बस्तियों में बीसलपुर का पानी 10 से 12 दिन के अंतराल पर मिलने की शिकायत है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस समस्या को जिला परिषद की साधारण सभा में भी उठाया जा चुका है, लेकिन समाधान का इंतजार है।
अजयसर-खरेखड़ी: आबादी भूमि और पट्टों का मुद्दा
अजयसर क्षेत्र में करीब 5,200 मतदाता हैं। यहां सरकारी विद्यालय में 12वीं तक पढ़ाई की सुविधा है, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार आबादी भूमि का विस्तार नहीं होने से पट्टे प्राप्त करने में परेशानी आती है।
ग्रामीण श्मशान और कब्रिस्तान के विकास की आवश्यकता भी जता रहे हैं। उनका कहना है कि बढ़ती आबादी के अनुरूप भूमि और जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि लोगों को मूलभूत जरूरतों के लिए कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।
सोमलपुर: आबादी भूमि सीमित, स्कूल में स्टाफ की कमी
करीब 9,500 मतदाताओं वाले सोमलपुर पंचायत क्षेत्र में लगभग 35 बाड़ियां और मजरे बताए जाते हैं। ग्रामीणों के अनुसार, आबादी क्षेत्र सीमित होने के कारण कई विकास कार्यों और सुविधाओं के विस्तार में दिक्कत आती है।
गांव में कश्मीर में शहीद हुए देवी खां की मजार भी है। स्थानीय लोग उनकी स्मृति में शहीद स्मारक बनाने के लिए करीब चार बीघा भूमि उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा सरकारी विद्यालय में शिक्षकों की कमी को दूर करने की जरूरत भी बताई जा रही है।
हटूंडी: पेयजल, सड़क और बिजली प्रमुख समस्याएं
हटूंडी में करीब 5,400 मतदाता हैं। यहां पेयजल की अनियमित आपूर्ति के साथ सड़क और बिजली संबंधी समस्याएं भी ग्रामीणों की प्रमुख चिंताओं में शामिल हैं। ग्रामीण आबादी भूमि के विस्तार की मांग कर रहे हैं, ताकि बढ़ती आबादी के अनुसार सुविधाओं का विकास हो सके।
चुनाव के बीच ग्रामीणों की अपेक्षाएं
जिला परिषद वार्ड-5 की समस्याएं बताती हैं कि शहर से सटे ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की जरूरत केवल मुख्य सड़कों तक सीमित नहीं है। कॉलोनियों की अंदरूनी सड़कें, नियमित पेयजल, विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक, आबादी भूमि और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार भी उतना ही जरूरी है।
आवाज़ राजस्थान की – पंचायती राज चुनावी चर्चा के माध्यम से इन स्थानीय मुद्दों को सामने लाने का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं और जनता की अपेक्षाओं को प्रमुखता देना है। अब ग्रामीणों की नजर चुनाव के बाद बनने वाली जिला परिषद और स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर रहेगी। लोगों की अपेक्षा है कि वर्षों से लंबित मांगों को प्राथमिकता मिले और योजनाओं का लाभ कागजों से निकलकर जमीन पर दिखाई दे।