अजमेर में पंचायत राज चुनाव का महासंग्राम आज, जिला परिषद के 15 वार्डों में मतदान 21 साल से भाजपा का दबदबा

अजमेर में पंचायत राज चुनाव का महासंग्राम आज, जिला परिषद के 15 वार्डों में मतदान 21 साल से भाजपा का दबदबा
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कांग्रेस के सामने इतिहास बदलने की चुनौती; आरएलपी के 17 प्रत्याशी बिगाड़ सकते हैं समीकरण

अजमेर। राजस्थान में पंचायती राज चुनाव के पहले चरण के तहत गुरुवार, 22 अक्टूबर को अजमेर जिले में जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए मतदान होगा। जिला परिषद के 15 वार्डों में मतदाता अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करेंगे। जिले में चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं। भाजपा अपना 21 साल पुराना दबदबा कायम रखने की कोशिश में है, जबकि कांग्रेस के सामने सत्ता के समीकरण बदलने की चुनौती है।

वहीं, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के 17 प्रत्याशियों की मौजूदगी मुकाबले को दिलचस्प बना रही है।33 वार्डों में 92 प्रत्याशी, बहुमत के लिए 17 सीटें जरूरीजिला परिषद के 33 वार्डों में कुल 92 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। बहुमत के लिए 17 सीटों की जरूरत होगी। भाजपा और कांग्रेस ने सभी वार्डों में अपने प्रत्याशी उतारे हैं, जबकि आरएलपी के 17 उम्मीदवार कई सीटों पर मुकाबले को त्रिकोणीय बना सकते हैं। इसके अलावा बहुजन समाज पार्टी और निर्दलीय प्रत्याशी भी चुनावी गणित को प्रभावित कर सकते हैं।राजनीतिक जानकारों के अनुसार, आरएलपी प्रत्याशियों का प्रदर्शन भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। कई सीटों पर जीत-हार का अंतर कम रहने की स्थिति में तीसरे दल और निर्दलीय उम्मीदवार निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।जिला प्रमुख की कुर्सी के लिए पांच चेहरे चर्चा मेंजिला परिषद चुनाव के साथ ही जिला प्रमुख पद को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

पूर्व जिला प्रमुख सुशील कंवर पलाड़ा सहित पांच प्रमुख नामों पर निगाहें टिकी हैं। इनमें सुशील कंवर पलाड़ा, पूजा भंसाली, सुनीता धेवरी, सीता देवी और कमलेश गुर्जर के नाम चर्चा में हैं।हालांकि, किसी भी दल ने जिला प्रमुख पद के लिए आधिकारिक तौर पर अपना दावेदार घोषित नहीं किया है। जिला प्रमुख का फैसला चुनाव परिणाम, दलों के संख्याबल और निर्वाचित सदस्यों के बीच बनने वाले राजनीतिक समीकरणों पर निर्भर करेगा।भाजपा के गढ़ में कांग्रेस की प्रतिष्ठा दांव परअजमेर जिला परिषद में वर्ष 2005 से भाजपा का दबदबा रहा है। इस बार कांग्रेस इस राजनीतिक स्थिति को बदलने की कोशिश में जुटी है।

भाजपा के सामने अपने पुराने जनाधार को बचाने की चुनौती है, वहीं कांग्रेस ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने के इरादे से चुनाव मैदान में है।चुनाव में स्थानीय मुद्दों और प्रत्याशियों की व्यक्तिगत छवि की भी अहम भूमिका रहने की संभावना है। पेयजल, सड़क, सिंचाई, सरकारी स्कूल, स्वास्थ्य सेवाएं, रोजगार और विकास योजनाओं का क्रियान्वयन ग्रामीण मतदाताओं के लिए प्रमुख मुद्दे हैं।सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, 3500 से अधिक जवान तैनातमतदान के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिले में 3500 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। संवेदनशील मतदान केंद्रों पर विशेष निगरानी रखने और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावी बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।जिला निर्वाचन अधिकारी लोकबंधु और पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाला ने सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा की। अधिकारियों को मतदान केंद्रों पर सतर्कता बरतने और किसी भी गड़बड़ी की सूचना पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।चुनाव पर्यवेक्षक से कर सकेंगे शिकायतराज्य निर्वाचन आयोग ने आईएएस अधिकारी मनीष गोयल को अजमेर जिले का चुनाव पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। चुनाव प्रक्रिया से संबंधित शिकायतों, अनियमितताओं या अन्य समस्याओं के लिए आमजन, प्रत्याशी और राजनीतिक दल उनसे संपर्क कर सकते हैं।

उप जिला निर्वाचन अधिकारी डी. अभिषेक गोयल के अनुसार, पर्यवेक्षक से सर्किट हाउस, अजमेर के कमरा नंबर 6 में दोपहर 1 से 2 बजे तक मुलाकात की जा सकती है। शिकायत के लिए संपर्क नंबर 0145-2940162 बताया गया है।28 और 30 अक्टूबर को पंच-सरपंच के चुनावपंचायती राज चुनाव कार्यक्रम के अनुसार, जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए पहले चरण का मतदान 22 अक्टूबर को और दूसरे चरण का मतदान 28 अक्टूबर को निर्धारित है। पंच-सरपंच के चुनाव 28 और 30 अक्टूबर को होंगे।जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों की मतगणना 20 नवंबर को होगी। इसके बाद 25 नवंबर को जिला प्रमुख, 26 नवंबर को उप जिला प्रमुख, 27 नवंबर को पंचायत समिति प्रधान और 28 नवंबर को उप प्रधान का चुनाव कराया जाएगा।

ग्रामीण मतदाता तय करेंगे राजनीतिक भविष्यअजमेर जिले के इस चुनाव में भाजपा, कांग्रेस और आरएलपी के बीच मुकाबला कई सीटों पर दिलचस्प रहने की उम्मीद है। भाजपा के सामने अपना पुराना वर्चस्व बनाए रखने की चुनौती है, जबकि कांग्रेस बदलाव की उम्मीद लगाए बैठी है। आरएलपी और निर्दलीय प्रत्याशियों की भूमिका भी अहम रह सकती है।अब मतदाताओं के फैसले पर सबकी निगाहें हैं। चुनाव परिणाम तय करेंगे कि अजमेर जिला परिषद में भाजपा अपना दबदबा कायम रखती है या कांग्रेस और अन्य दल नए राजनीतिक समीकरण बनाकर जिला प्रमुख की कुर्सी तक पहुंचने में सफल होते हैं।

Vijay Kumar Parashar

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