अशोक गहलोत का केंद्र पर निशाना, बोले- महिला आरक्षण कांग्रेस का विजन, सरकार कर रही है भ्रमित
जयपुर – प्रतीक पाराशर :
महिला आरक्षण को लेकर देशभर में चल रही बहस के बीच राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण कोई नई पहल नहीं, बल्कि कांग्रेस की दीर्घकालिक सोच और विजन का परिणाम है।
गहलोत ने स्पष्ट किया कि देश में जमीनी स्तर पर महिलाओं को राजनीतिक नेतृत्व देने का श्रेय कांग्रेस और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को जाता है। पंचायती राज संस्थाओं और स्थानीय निकायों में महिलाओं को आरक्षण देने की पहल ने लाखों महिलाओं को राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर प्रदान किया।
उन्होंने कहा कि यह राजीव गांधी का सपना था, जिसे कांग्रेस ने वर्षों से आगे बढ़ाया है।
केंद्र सरकार की भूमिका पर उठाए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया वक्तव्य पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस संवेदनशील विषय पर राजनीतिक सहमति का माहौल बनाया जाना चाहिए था।
गहलोत के अनुसार, प्रधानमंत्री के पास यह अवसर था कि वे पक्ष और विपक्ष को साथ लेकर चलते, लेकिन इसके बजाय उन्होंने ऐसा वातावरण बनाया जिससे यह प्रतीत हो कि विपक्ष महिला आरक्षण का विरोध कर रहा है। उन्होंने कहा कि वास्तविकता इसके विपरीत है और लगभग सभी राजनीतिक दल इस मुद्दे के समर्थन में हैं।
परिसीमन को लेकर चिंता व्यक्त
गहलोत ने महिला आरक्षण के साथ परिसीमन के मुद्दे को जोड़ने पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इतने महत्वपूर्ण विषय पर व्यापक संवाद और पारदर्शिता आवश्यक है।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या परिसीमन को लेकर सभी राज्यों, विशेषकर दक्षिण भारत के राज्यों और अन्य हितधारकों से चर्चा की गई है। साथ ही उन्होंने यह भी जानना चाहा कि क्या इस विषय पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से कोई औपचारिक चर्चा की गई।
महिला नेतृत्व में कांग्रेस की भूमिका रेखांकित
गहलोत ने कहा कि कांग्रेस की नीतियों के चलते ही देश को प्रतिभा पाटिल के रूप में पहली महिला राष्ट्रपति मिलीं और इंदिरा गांधी के रूप में महिला प्रधानमंत्री का नेतृत्व देखने को मिला।
उन्होंने यह भी कहा कि मीरा कुमार जैसी महिला नेता लोकसभा अध्यक्ष पद तक पहुंचीं, जो कांग्रेस की समावेशी सोच को दर्शाता है।
गहलोत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि भाजपा में अब तक किसी महिला को राष्ट्रीय अध्यक्ष का दायित्व नहीं दिया गया है, जिससे महिला नेतृत्व के प्रति उसके दृष्टिकोण पर सवाल खड़े होते हैं।