प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 अंतर्गत(जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग)जल प्रबंधन एवं उन्नत कृषि तकनीकों पर प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न- केवीके के मुख्य वैज्ञानिक श्री धर्मेंद्र भाटी और ग्रामीण विकास विशेषज्ञ आनंद शर्मा ने किसानों को दिए सफलता के मंत्र
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 अंतर्गत
(जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग)
जल प्रबंधन एवं उन्नत कृषि तकनीकों पर प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न
- केवीके के मुख्य वैज्ञानिक श्री धर्मेंद्र भाटी और ग्रामीण विकास विशेषज्ञ आनंद शर्मा ने किसानों को दिए सफलता के मंत्र
- वैज्ञानिक दिनेश कच्छावा ने समझाया बीज उपचार का ‘FIR नियम’, तकनीकी विशेषज्ञ आशीष झरोटिया ने दिया मिट्टी परीक्षण का सजीव प्रदर्शन
अजमेर। स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र मेंजलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग की और से उन्नत खरीफ कृषि तकनीकों और जल संवर्धन को लेकर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत भारतीय परंपरा के अनुसार मुख्य अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर और पुष्पमाला अर्पित कर की गई। इस अवसर पर पीसांगन ग्रामीण क्षेत्र से आए लगभग 30 प्रगतिशील किसानों और प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
पारंपरिक बनाम आधुनिक व जैविक खेती पर चर्चा
कार्यक्रम के मुख्य सत्र में कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य वैज्ञानिक श्री धर्मेंद्र सिंह भाटी ने उपस्थित किसानों को संबोधित करते हुए केंद्र द्वारा दी जाने वाली विभिन्न तकनीकी सहायताओं और योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कई व्यावहारिक उदाहरण देते हुए समझाया कि किस प्रकार पारंपरिक कृषि पद्धतियों में सुधार करके आधुनिक कृषि को अपनाया जा सकता है। श्री भाटी ने प्राकृतिक खेती और जैविक खेती के महत्व पर विशेष बल दिया, ताकि भूमि की उर्वरा शक्ति को बचाते हुए किसान अपनी लागत कम कर सकें और अधिक लाभ कमा सकें।
सत्र को आगे बढ़ाते हुए ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज के मुख्य सलाहकार आनन्द शर्मा ने वाटरशेड प्रबंधन विषय पर अत्यंत विस्तृत और तकनीकी जानकारी साझा की।
श्री आनन्द शर्मा ने वाटरशेड प्रबंधन अंतर्गत वर्षा जल को बहने से रोककर उसे स्थानीय स्तर पर ही सहेजने और भूजल स्तर को बढ़ाने की रणनीतियों पर चर्चा की साथ ही
मिट्टी और नमी का संरक्षण ढलान के विपरीत जुताई, मेड़बंदी और खाइयों के निर्माण द्वारा खेत के पानी और खेत की मिट्टी को खेत में ही रोकने के उपाय बताये। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में एनिकट, तालाब, फार्म पोंड और टांकों के निर्माण व उनके रख-रखाव में समुदाय की भागीदारी के साथ साथ उपलब्ध पानी का फसलों के चयन और सिंचाई तकनीकों (जैसे ड्रिप और स्प्रिंकलर) के माध्यम से विवेकपूर्ण उपयोग करना बताया।
तकनीकी सत्र में केंद्र के वैज्ञानिक श्री दिनेश कच्छावा ने बीज व मृदा उपचार का सैद्धांतिक ज्ञान साँझा किया साथ ही किसानों को बेहद सरल और प्रभावी ढंग से FIR नियम के बारे में सैद्धांतिक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फसलों को बीमारियों और कीटों से बचाने के लिए बुआई से पहले बीज और मृदा का वैज्ञानिक तरीके से उपचार करना क्यों आवश्यक है और इसके लिए दवाओं का सही क्रम क्या होना चाहिए।
सैद्धांतिक जानकारी के बाद, केंद्र के तकनीकी विशेषज्ञ आशीष झरोटिया ने किसानों को इसका व्यावहारिक और सजीव प्रदर्शन करके दिखाया। झरोटिया ने खेत से मिट्टी का नमूना एकत्र करने की सही विधि का लाइव डेमो दिया। उन्होंने प्रैक्टिकल के माध्यम से समझाया कि मिट्टी टेस्ट करने के लिए खेत में किन-किन स्थानों (Z-पैटर्न और सही गहराई) से मिट्टी उठानी चाहिए, ताकि प्रयोगशाला से आने वाली जांच रिपोर्ट बिल्कुल सटीक हो और किसान उसी अनुसार खाद का उपयोग कर सकें।
कार्यक्रम के अंत में सभी आगंतुकों और संभागियों का आभार व्यक्त किया गया। उपस्थित किसानों ने इस प्रशिक्षण को अत्यंत ज्ञानवर्धक बताते हुए कहा कि विशेषज्ञों के व्याख्यान और व्यावहारिक प्रदर्शन के माध्यम से सीखी गई ये तकनीकें उनके खेतों में उत्पादन बढ़ाने और पानी की बचत करने में गेम-चेंजर साबित होंगी।