अजमेर में आधी पंचायत समितियां विकास अधिकारी विहीन, विकास कार्यों पर उठे सवाल
अजमेर में आधी पंचायत समितियां विकास अधिकारी विहीन, विकास कार्यों पर उठे सवाल
राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से मजबूत जिले में 10 में से 5 पंचायत समितियों में बीडीओ का पद रिक्त, अतिरिक्त प्रभार के भरोसे चल रहा कामकाज
अजमेर। पंचायत राज विभाग की हाल ही में जारी विकास अधिकारियों (बीडीओ) की तबादला सूची के बाद अजमेर जिले की पंचायत समितियों में अधिकारियों की कमी एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। प्रदेश के राजनीतिक और प्रशासनिक रूप से महत्वपूर्ण माने जाने वाले अजमेर जिले में आज भी आधी पंचायत समितियां नियमित विकास अधिकारी के बिना संचालित हो रही हैं।
जानकारी के अनुसार जिले की अजमेर ग्रामीण, श्रीनगर, सरवाड़ और सावर पंचायत समिति में विकास अधिकारी का पद रिक्त है। वहीं बड़ल्या पंचायत समिति अभी अस्तित्व में नहीं आई है। ऐसे में जिले की कुल 10 पंचायत समितियों में से 5 में नियमित विकास अधिकारी नहीं होने से विकास कार्यों की गति पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
विकास अधिकारी पंचायत समिति का प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी होता है, जिसके जिम्मे ग्रामीण विकास योजनाओं की निगरानी, बजट का संचालन, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, जनसुनवाई और विभिन्न सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होता है। ऐसे महत्वपूर्ण पद लंबे समय तक रिक्त रहने से प्रशासनिक कार्य प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है।
वर्तमान में कई पंचायत समितियों का संचालन अतिरिक्त प्रभार के माध्यम से किया जा रहा है, जबकि कहीं-कहीं सहायक अभियंता (AEN) को विकास अधिकारी का कार्यभार सौंपा गया है। हालांकि यह व्यवस्था अस्थायी राहत तो देती है, लेकिन नियमित अधिकारी के अभाव में विकास कार्यों की निरंतर निगरानी और निर्णय प्रक्रिया प्रभावित होती है।
ग्रामीण क्षेत्रों के जनप्रतिनिधियों और लोगों का कहना है कि जब सरकार ने बड़े स्तर पर तबादले किए हैं तो अजमेर जैसे महत्वपूर्ण जिले की रिक्तियों को प्राथमिकता क्यों नहीं दी गई। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर इन पदों पर नियमित नियुक्ति कब होगी और क्या अतिरिक्त प्रभार के भरोसे ग्रामीण विकास को अपेक्षित गति मिल पाएगी?