अजमेर के रामसेतु ब्रिज की गुणवत्ता पर उठे सवाल, कोर्ट में दायर हुई जनहित याचिका — 15 वकीलों की टीम करेगी पैरवी
अजमेर | प्रतीक पाराशर
243 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित अजमेर का रामसेतु एलिवेटेड ब्रिज अब विवादों के घेरे में आ गया है। शनिवार को शहर के एक जागरूक नागरिक द्वारा इस ब्रिज की गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए अजमेर की जिला कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई। याचिका में ठेकेदार, निर्माण कंपनी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ न्यायिक जांच की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता की ओर से रखी गई मांगें
प्रतिवादी जितेश धनवानी ने जानकारी देते हुए बताया कि 3 जुलाई को ब्रिज पर सड़क धंसने की घटना के बाद यह कदम उठाया गया। याचिका में ब्रिज के निर्माण में प्रयुक्त सामग्री की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों की जांच की मांग प्रमुख रूप से की गई है। साथ ही मांग की गई है कि दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही हो और भविष्य में आम नागरिकों को ऐसे किसी भी खतरे से बचाया जा सके।
243 करोड़ की लागत, 3 सालों में बना ब्रिज
एडवोकेट विवेक पाराशर ने बताया कि यह ब्रिज तीन वर्षों के लंबे समय में तैयार किया गया, जबकि निर्माण कार्य समयसीमा से पीछे था। निर्धारित डेडलाइन तक कार्य पूरा न करने पर ठेकेदार पर जुर्माना (पेनल्टी) भी लगाया गया था, जिसे बाद में माफ कर दिया गया — याचिका में इस निर्णय की भी जांच की मांग की गई है।
याचिका में शामिल प्रमुख बिंदु:
- ब्रिज निर्माण में उपयोग की गई सामग्री की गुणवत्ता की जांच
- ठेकेदार और अधिकारियों की भूमिका की जांच
- पेनल्टी माफ करने के निर्णय का लेखा-जोखा
- दोषी पाए जाने पर राशि की वसूली कर राजकोष में जमा
- ब्रिज को सुरक्षा जांच पूरी होने तक बंद करने की मांग
15 अधिवक्ताओं की कानूनी टीम करेगी पैरवी
मामले की सुनवाई सोमवार को प्रस्तावित है, जिसमें याचिकाकर्ता पक्ष से 15 से अधिक अधिवक्ता न्यायालय में अपना पक्ष रखेंगे। कानूनी टीम इस मामले को जनहित से जुड़ा हुआ बताते हुए इसे अजमेर शहर की सुरक्षा और भविष्य से जोड़कर पेश करेगी।