जिले के अधिकारीयों ने किया 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान कैंप का किया निरीक्षण
जिले के अधिकारीयों ने किया 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान कैंप का किया निरीक्षण
उप मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ रामस्वरूप किराड़िया ने HWC सिलोरा (टीबी यूनिट किशनगढ़) पर 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान कैंप का किया निरीक्षण
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ लोकेश गुप्ता ने पीएचसी गेगल (टीबी यूनिट अजमेर रूरल) पर 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान कैंप का किया निरीक्षण
इस दौरान अधिकारीयों ने समस्त चिकित्सा कर्मियों को निर्देशित किया की कैंप के दौरान ओपीडी में आने वाले एवं फील्ड में आशा सहयोगिनीयों के माध्यम से समस्त टीबी संभावित रोगियों की शत प्रतिशत टीबी स्क्रीनिंग कर उन सभी की एक्सरे जांच की जाना सुनिश्चित की जाए।
इस दौरान किशनगढ़ बीसीएमओ डॉ सर्वज्ञ चतुर्वेदी सहित चिकित्साकर्मी मौजूद रहे।
100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान कैंप में AI बेस्ड एक्सरे से की जा रही मरीज़ो की जांच
वर्तमान में अजमेर जिले में संचालित 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान कैंप में समस्त टीबी संभावित रोगियों की AI (Artificial Intelligence) आधारित एक्सरे जांच की जा रही है जिसमे AI (Artificial Intelligence) आधारित द्वारा यह ज्ञात हो जाता है की मरीज़ की एक्सरे जांच नार्मल है या एब्नार्मल, और यदि मरीज़ की एक्सरे जांच एब्नार्मल पायी जाती है तो ऑन स्पॉट मरीज़ का NAAT जांच हेतु सैंपल लिया जाता है।
केंद्र सरकार द्वारा चिन्हित हाई रिएक एरिया में आयोजित हो रहे है टीबी स्क्रीनिंग एवं एक्सरे जांच कैंप
सेंट्रल टीबी डिवीज़न द्वारा जिले में हाई रिस्क एरिया का चयन किया गया है जिसमे आगामी 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत टीबी संभावित रोगियों की स्क्रीनिंग एवं एक्सरे जांच शिविर का आयोजन किया जा रहा है।
टीबी मुक्त भारत अभियान
100 दिवसीय विशेष टीबी मुक्त भारत अभियान
100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान में केंद्रीय क्षय अनुभाग नई दिल्ली द्वारा चिन्हित हाई रिस्क गांव/शहर (क्षेत्र) के आयुष्मान आरोग्य मंदिर (राजकीय चिकित्सा संस्थान) में चिकित्सा शिविर का आयोजन किया जाएगा जिसके अंतर्गत 14 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों की टीबी स्क्रीनिंग कर उनकी एचबी, शुगर, बीपी, बीएमआई जांच सहित उनकी एक्सरे जांच की जाएगी और यदि मरीज़ की एक्सरे जांच एब्नार्मल पाई जाती है तो मरीज़ का NAAT जाँच हेतु बलगम का सैंपल लिया जाकर उसकी NAAT जांच की जाएगी और यदि मरीज़ NAAT जांच में टीबी रोग से ग्रसित पाया जाता है तो उसे टीबी का इलाज दिया जाएगा।
इसके अतिरिक्त उच्च जोखिम वाले समूह (high risk groups) जैसे छात्रावास, ओल्ड ऐज होम, अनाथ आश्रम, जेल, किशोर निरोध केंद्र (juvenile detention center), निराश्रित केंद्र (destitute center), रेन बसेरा, सरकार द्वारा आवंटित बीपीएल क्वाटर्स, औद्योगिक क्षेत्र आदि में भी उक्त अभियान की समस्त गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
टीबी हारेगा देश जीतेगा