किसानों के सच्चे मार्गदर्शक, दूरदर्शी कृषि अधिकारी, समाजसेवी रमेश चंद्र शर्मा

किसानों के सच्चे मार्गदर्शक, दूरदर्शी कृषि अधिकारी, समाजसेवी रमेश चंद्र शर्मा
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स्वर्गीय पिताश्री रमेश चंद्र शर्मा को 75वें जन्मदिवस पर भावपूर्ण स्मरण एवं विनम्र श्रद्धांजलि
आज आपके 75वें जन्मदिवस पर आपको स्मरण करते हुए मन गर्व, कृतज्ञता, श्रद्धा और भावनाओं से भर उठता है। आप केवल हमारे पूज्य पिताश्री ही नहीं थे, बल्कि किसानों के सच्चे मार्गदर्शक, दूरदर्शी कृषि अधिकारी, समाजसेवी और जनकल्याण के लिए पूर्णतः समर्पित ऐसे कर्मयोगी थे, जिन्होंने अपने जीवन को सेवा, ईमानदारी और मानवता के सर्वोच्च आदर्शों के लिए समर्पित कर दिया।
आपने अपने कृषि अधिकारी पद को कभी मात्र सरकारी दायित्व नहीं माना, बल्कि किसानों की सेवा को अपना जीवनधर्म बनाया। गांव-गांव जाकर किसानों की समस्याओं को समझना, उनकी परिस्थितियों को जानना, खेतों में जाकर उनके साथ खड़ा रहना और उन्हें नई कृषि तकनीकों, उन्नत बागवानी तथा सरकारी योजनाओं से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना—यही आपकी कार्यशैली थी। आप किसानों के बीच अधिकारी कम, परिवार के सदस्य अधिक थे। यही कारण है कि आपने जहां भी कार्य किया, वहां केवल योजनाएं नहीं पहुंचीं, बल्कि विश्वास, विकास और समृद्धि पहुंची।
मुझे आज भी वह दौर स्पष्ट स्मरण है जब पुष्कर क्षेत्र गुलाब और अमरूद की खेती के लिए प्रसिद्ध था। गांव-गांव में अमरूदों के विशाल बगीचे किसानों की आजीविका का आधार थे। फिर लगभग वर्ष 1992 के आसपास अमरूद के बगीचों पर एक गंभीर बीमारी का प्रकोप हुआ। देखते ही देखते पेड़ सूखने लगे, बगीचे उजड़ने लगे और किसानों के सामने गहरा संकट खड़ा हो गया। उस समय आपने इस समस्या को केवल कृषि संकट नहीं माना, बल्कि हजारों परिवारों के भविष्य का प्रश्न समझा। आपने बाहर से वरिष्ठ वैज्ञानिकों को बुलवाया, उन्हें अपने घर ठहराया, क्षेत्र का भ्रमण कराया और किसानों की समस्या के समाधान हेतु हरसंभव प्रयास किए। यद्यपि अमरूद के बगीचों को बचाया नहीं जा सका, पर आपने हार नहीं मानी।
आपकी दूरदर्शिता ने वहीं से एक नए अध्याय की शुरुआत की। आपने किसानों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए उत्तर प्रदेश से उच्च गुणवत्ता वाले ग्राफ्टेड चकिया आंवले के पौधे सरकारी योजना और उद्यान विभाग की सहायता से मंगवाए। आपने किसानों को प्रेरित किया कि वे निराश न हों, बल्कि नई संभावना को अपनाएं। पुष्कर के गनाहेड़ा गांव में जब ग्राफ्टेड आंवले का पहला ट्रक पहुंचा, तब किसानों का उत्साह देखने योग्य था। कुछ ही समय में सभी पौधे किसानों में वितरित हो गए। जिन खेतों में कभी अमरूद के बगीचे थे, वहां धीरे-धीरे आंवले की हरियाली ने नया इतिहास रच दिया। आज पुष्कर क्षेत्र के गांव-गांव में फैले आंवले के समृद्ध बगीचे आपकी दूरदर्शिता, अथक परिश्रम और किसानों के प्रति आपके समर्पण की जीवित पहचान हैं।
आप केवल खेती सुधारने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि आपने गरीब किसानों के जीवन को टूटने से भी बचाया। आप किसी भी किसान को मजबूरी में अपनी जमीन बेचते नहीं देख सकते थे। आपने अनेक किसानों को बैंक ऋण दिलवाया, उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ा, आर्थिक सहारा दिया और बार-बार यही प्रेरणा दी कि “कैसी भी परिस्थिति हो, अपनी जमीन मत बेचना; यही तुम्हारे भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी है।” यह कार्य भले ही आपकी औपचारिक जिम्मेदारी का हिस्सा न रहा हो, लेकिन आपकी संवेदनशीलता और किसान हितैषी सोच ने आपको ऐसा करने के लिए प्रेरित किया।
आज आपके कार्यों की सबसे बड़ी सफलता यह है कि समय बीत गया, पीढ़ियां बदल गईं, लेकिन आपकी स्मृतियां और आपका प्रभाव आज भी जीवित है। जब आज लगभग 35 वर्षों बाद भी मैं पुष्कर और आसपास के गांवों में जाता हूं, तो अनेक किसान परिवारों से मिलना होता है। वे आज भी आपको अत्यंत श्रद्धा और भावुकता से याद करते हैं। कई किसान गर्व से कहते हैं कि “आपके पिताजी की प्रेरणा, मार्गदर्शन और सहायता से ही हम आज सफल किसान बन पाए हैं।” उनके शब्द केवल प्रशंसा नहीं होते, बल्कि यह आपके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि का प्रमाण होते हैं। यह सुनकर हृदय गर्व और भावनाओं से भर उठता है कि आपका किया हुआ परिश्रम केवल उस समय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पीढ़ियों तक किसानों के जीवन को दिशा देता रहा।
किसानों की आंखों में आपके लिए सम्मान, उनके शब्दों में कृतज्ञता और उनकी सफलता में आपका योगदान आज भी स्पष्ट दिखाई देता है। वास्तव में यही किसी भी व्यक्ति के जीवन की सबसे बड़ी कमाई होती है—जब उसके जाने के दशकों बाद भी लोग उसे सम्मान, प्रेम और प्रेरणा के साथ याद करें।
पिताजी, आपने हमें सिखाया कि सच्चा जीवन वही है जो दूसरों के जीवन में उजाला भर दे। आपकी ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा, व्यवहारकुशलता, संवेदनशीलता और सेवा भाव हमारे लिए सदैव प्रेरणास्तंभ रहेंगे। आपने केवल अपने परिवार को ही नहीं, बल्कि हजारों किसान परिवारों को भी आत्मनिर्भरता, सम्मान और समृद्धि का मार्ग दिखाया।
आज भले ही आप हमारे बीच भौतिक रूप से उपस्थित नहीं हैं, लेकिन पुष्कर की मिट्टी, किसानों की समृद्धि, आंवले के हरे-भरे बगीचे और अनगिनत परिवारों की सफलताओं में आपका व्यक्तित्व आज भी जीवित है। आपकी स्मृतियां हमारे हृदय में सदैव रहेंगी और आपका आदर्श जीवन हमें निरंतर प्रेरणा देता रहेगा।
शत-शत नमन।
भावपूर्ण स्मरण।
विनम्र श्रद्धांजलि। 🙏

admin - awaz rajasthan ki

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