आधुनिक जल प्रबंधन और सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों पर प्रशिक्षण आयोजित

आधुनिक जल प्रबंधन और सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों पर प्रशिक्षण आयोजित
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आधुनिक जल प्रबंधन और सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों पर प्रशिक्षण आयोजित

​अजमेर। स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र, अजमेर द्वारा कृषि क्षेत्र में तकनीकी विस्तार और जल संसाधनों के कुशल उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण में DAESI (कृषि इनपुट डीलरों के लिए कृषि विस्तार सेवाओं में डिप्लोमा) के प्रतिभागियों और विभिन्न सहकारी समितियों के व्यवस्थापकों ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत में कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिकों द्वारा मुख्य अतिथियों, विषय विशेषज्ञों और सभी प्रतिभागियों का पारंपरिक रूप से स्वागत व अभिनंदन किया गया।
​इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में ग्रामीण विकास और जल शासन विशेषज्ञ आनंद शर्मा ने मुख्य संदर्भ व्यक्ति के रूप में शिरकत की और जल प्रबंधन से जुड़े विभिन्न तकनीकी व व्यावहारिक विषयों पर सत्र लिए। उन्होंने सिंचाई के बुनियादी सिद्धांतों और फसल उत्पादन में जल प्रबंधन के महत्व को रेखांकित करते हुए जल उपयोग दक्षता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार आधुनिक कृषि में ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों की स्थापना और उनका सही प्रबंधन करके पानी की हर एक बूंद का सर्वोत्तम उपयोग किया जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने इन प्रणालियों की स्थापना के लिए आवश्यक बजट और वित्तीय आवश्यकताओं के बारे में भी विस्तार से समझाया।
​विशेषज्ञ आनंद शर्मा ने शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों के लिए जल संचयन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए ‘इन-सिटू’ और ‘एक्स-सिटू’ तकनीकों के व्यावहारिक पहलुओं को सामने रखा। उन्होंने एकीकृत वाटरशेड प्रबंधन के सिद्धांतों को समझाते हुए बताया कि जल और भूमि का समन्वित विकास ग्रामीण आत्मनिर्भरता के लिए कितना जरूरी है। इसके अलावा, वर्षा आधारित और बारानी खेती वाले क्षेत्रों के प्रबंधन पर बात करते हुए उन्होंने शुष्क व सूखी खेती के तरीकों, अंतःसस्यन, फसल चक्र और कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली फसलों के सही चयन की तकनीकों से भी सभी को अवगत कराया।
​कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के अन्य वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने भी तकनीकी सत्रों को संबोधित किया। श्री लोकेश चौहान ने कृषि की आधुनिक तकनीकों, उन्नत बीज चयन, मृदा स्वास्थ्य और फसलों को कीटों व बीमारियों से बचाने के समेकित उपायों पर महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारी साझा की। वैज्ञानिकों ने प्रतिभागियों से कहा कि चूंकि डीलर और सहकारी समितियों के व्यवस्थापक सीधे तौर पर किसानों के संपर्क में रहते हैं, इसलिए उनका इन तकनीकों से अपडेट होना ग्रामीण स्तर पर बड़े बदलाव ला सकता है।
​सत्र के समापन पर सभी प्रतिभागियों की शंकाओं का समाधान किया गया। कार्यक्रम के अंतिम चरण में कृषि विज्ञान केंद्र अजमेर की प्रबंधन टीम द्वारा सभी विषय विशेषज्ञों को उनके बहुमूल्य मार्गदर्शन के लिए और सभी संभागियों को प्रशिक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया गया।

admin - awaz rajasthan ki

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