सिलौरा में नियम विरुद्ध पट्टा जारी करने पर तीन ग्राम विकास अधिकारियों पर कार्रवाई,वेतन वृद्धि रोकने के आदेश जारी किये गये!
सिलौरा में नियम विरुद्ध पट्टा जारी करने पर तीन ग्राम विकास अधिकारियों पर कार्रवाई,वेतन वृद्धि रोकने के आदेश जारी किये गये!
किशनगढ़। पंचायत समिति किशनगढ़ की ओर से ग्राम पंचायत सिलौरा में नियम विरुद्ध पट्टे जारी करने के मामले में तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की गई है। अजमेर जिला परिषद के निर्देशानुसार विकास अधिकारी पंचायत समिति किशनगढ़ ने 31 जुलाई 2026 को अलग-अलग कार्यालय आदेश जारी कर रामनिवास और मांगीलाल माली तथा मुकेश जाट की वेतन वृद्धि रोकने के आदेश जारी किये गये!
कार्यालय आदेश के अनुसार, रामनिवास, तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी ग्राम पंचायत सिलौरा, के कार्यकाल में वर्ष 2021-22 में एक व्यक्ति को राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 157(1) के तहत नियम विरुद्ध खाली भूखंड का पट्टा जारी किए जाने का मामला सामने आया। पट्टा डीएलसी दर 819 रुपए प्रति वर्गगज के आधार पर जारी किया गया, जिससे 2,18,394 रुपए की वित्तीय/राजकीय हानि का आरोप है। मामले की जांच में तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी को दोषी पाया गया।
जांच प्रक्रिया में पर्याप्त अवसर दिए जाने के बावजूद अपेक्षित सहयोग नहीं करने के चलते राजस्थान सिविल सेवाएं (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1958 के नियम 16 के तहत एकतरफा कार्रवाई की गई। आदेश में रामनिवास की एक संचयी वार्षिक वेतन वृद्धि भविष्य के प्रभाव से रोकने के आदेश दिये । हालांकि संबंधित वसूली राशि 2,18,394 रुपए की वसूली राजस्थान उच्च न्यायालय की खंडपीठ जयपुर के निर्णय के अधीन रखी गई है।
इसी प्रकार मांगीलाल माली, तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी ग्राम पंचायत सिलौरा, के कार्यकाल में वर्ष 2023-24 में 19 व्यक्तियों को नियम विरुद्ध खाली भूखंडों के पट्टे जारी करने का मामला सामने आया। आदेश के अनुसार डीएलसी दर 819 रुपए प्रति वर्गगज के आधार पर जारी पट्टों से 24,96,591 रुपए की वित्तीय/राजकीय हानि होना बताया गया है।
इस मामले में जिला परिषद अजमेर एवं पंचायत समिति किशनगढ़ की जांच में तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी को दोषी ठहराया गया। जांच में अपेक्षित सहयोग नहीं करने के आधार पर मांगीलाल माली को दो संचयी वार्षिक वेतन वृद्धियां भविष्य के प्रभाव से रोकने के दंड से दंडित किया गया।
पंचायत समिति ने संबंधित शाखाओं को दोनों मामलों में दंड का उल्लेख संबंधित कर्मचारियों की सेवा पुस्तिका में करने तथा न्यायालय के निर्णय के अधीन निर्धारित राशि की वसूली की कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।