वीबी जीरामजी : फर्जी हाजिरी का खेल पड़ेगा भारी फर्जी हाजिरी पर मेट के साथ साथ अन्य अधिकारियों की भी तय होगी जिम्मेदारी
वीबी जीरामजी : फर्जी हाजिरी का खेल पड़ेगा भारी फर्जी हाजिरी पर मेट के साथ साथ अन्य अधिकारियों की भी तय होगी जिम्मेदारी
अजमेर। वीबी जीरामजी योजना में फर्जी हाजिरी लगाकर सरकारी बजट डकारने वाले भ्रष्टाचारियों के लिए अब बच निकलना आसान नहीं होगा। अब तक शिकायतों के नाम पर केवल निचले स्तर पर केवल मैट को ब्लैक लिस्ट करके लीपा पोती करते हुए
पूरी घांचली पर पर्दा डाल दिया जाता था। लेकिन अब फर्जी हाजरी के खेल में शामिल जनप्रतिनिधि व अन्य अधिकारी की भूमिका पर नजर रखी जायेगी तथा बड़े अधिकारियों और कार्मिकों पर भी सीधी गाज गिरना तय हो गया है। शिकायतों को बिना जांच के निपटाने और लीपापोती करने के बढ़ते मामलों को देखते हुए यह सख्त रुख अपनाया गया है। दरअसल, योजना के तहत होने वाले फजीर्वाड़े और फर्जी हाजिरी को लेकर ग्राम पंचायत से लेकर जिला स्तर तक आम जन और जनप्रतिनिधियों
द्वारा केंद्रीय लोक शिकायत एवं निगरानी प्रणाली (सीपी ग्राम) पोर्टल पर लगातार शिकायतें दर्ज कराई जा रही थीं। इन शिकायतों की पड़ताल में चौंकाने वाला सच सामने आया। जिलों में ग्राम पंचायत और पंचायत समिति स्तर से जो जांच रिपोर्ट भेजी जाती थी, उसमें न तो कोई पुख्ता दस्तावेज होते थे और न ही तथ्यों की गहराई से जांच की जाती थी। खानापूर्ति करके रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड कर दी जाती थी, जिससे असली गुनहगार बच निकलते थे और सारा ठीकरा सिर्फ मैट के सिर फोड़ दिया जाता था। अब निचले स्तर की फर्जी रिपोर्ट से इतिश्री करने का रास्ता बंद कर दिया गया है। पारदर्शी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया जा रहा है।
इस तरह कसा जाएगा सिस्टम
शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए अब जांच का जिम्मा जिला स्तर के सक्षम अधिकारियों, कनिष्ठ तकनीकी सहायकों और विशेष जांच कमेटियों को सौंपा जाएगा।
जांच के दौरान केवल बयानबाजी नहीं चलेगी, बल्कि शिकायत के निस्तारण से जुड़े हर एक जरूरी दस्तावेज और सबूतों को रिपोर्ट के साथ लगाना अनिवार्य होगा।
पूरी तथ्यात्मक रिपोर्ट को समय सीमा के भीतर सीपी ग्राम पोर्टल पर अपलोड करना होगा, ताकि उच्च स्तर पर समीक्षा हो सके और फर्जी हाजिरी के इस पूरे नेटवर्क में शामिल हर छोटे-बड़े दोषी पर कड़ी कार्रवाई की जा सके।