ग्राम पंचायत पुनर्गठन की अधिसूचना फिर अटकी, 800 गांवों पर अब भी सीएम स्तर से मंजूरी शेष
जयपुर। प्रदेश में ग्राम पंचायतों के परिसीमन की अधिसूचना जारी होने में फिर अड़चन आ गई है। सीएम स्तर से मंजूरी मिलने के बाद संभवतः इस 1 महीने के अंत तक या अगले महीने इसे जारी किया जा सकता है। अधिसूचना जारी होने की तय वारीख 11 जून निकल चुकी है। पंचायतीराज विभाग के अफसरों का कहना है कि मुख्यमंत्री कार्यालय स्तर से अधिसूचना पर मंजूरी मिलने के बाद इसे जारी किया जाएगा। अधिसूचना अटकने के कारण नए मापदंडों के तहत
करीब 800 नई ग्राम पंचायतों के सूजन की प्रक्रिया भी अटक गई है। पंचायतों के परिसीमन और पुनर्गठन के लिए सरकार ने 20 जनवरी को प्रक्रिया शुरू की। जिसके तहत 20 जनवरी से 18 फरवरी तक कलक्टरों के माध्यम से प्रस्ताव तैयार करने और 25 मार्च तक सीमांकन पूरा करने के निर्देश दिए गए थे। परिसीमन के प्रस्तावों पर अप्रैल में मांगी गई आपत्तियों के बाद कुछ ग्राम पंचायतों का मामला कोर्ट में चला गया और शेष पंचायतों की अधिसूचना जारी की जानी थी।
ये थे परिसीमन के मापदंड
जनसंख्य आधार पर सामान्य क्षेत्रों में ग्रामपंचायत बनाने के लिए पहले न्यूनतम चार हजार और अधिकतम छह हजार मापदंड तय किए। बाद में संशोधित कर इसे न्यूनतम तीन हजार और अधिकतम 5500 कर दिया गया। रेगिस्तानी और आदिवासी क्षेत्रों में विशेष छूट के तहत दो हजार की जनसंख्या पर भी ग्राम पंचायत बनाई जा सकती है। पंचायत समिति के लिए तय मापदंड में पहले 40 ग्राम पंचायतों पर एक पंचायत समिति बनती थी, लेकिन अब इसे घटाकर 25 ग्राम पंचायत का प्रावधान किया गया है। यदि 25 ग्राम पंचायतें उपलब्ध नहीं हैं तो नवसूजित पंचायत समिति में जा सकती हैं। पंचायत समिति में दो लाख या अधिक जनसंख्या होने पर पुनर्गठन किया जा सकता है। और प्रशासनिक मापदंड भी तय किए। जिसमें एक पूर्ण राजस्व गांव केवल एक ही ग्राम पंचायत में शामिल होगा, इसे वो पंचायतों में विभाजित नहीं किया जा सकता। नवसूजित या पुर्नगठित ग्राम पंचायत एक ही विधानसभा क्षेत्र में होगी। दूसरी ग्राम पंचायत के मुख्यालय से दूरी छह किमी से अधिक नहीं होनी चाहिए। रेगिस्तान और अनुसूचित क्षेत्रों में कलक्टरों शिथिलता देने की शक्ति दी गई