मरणोपरांत महिला का करवाया नेत्र दान

मरणोपरांत महिला का करवाया नेत्र दान
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अंतिम साँस में भी उदारता: 75 वर्षीय महिला के नेत्र किए दान।
नेत्रदान से अमर हुई महिला की स्मृति। माँ का समर्पण भाव देख पुत्रों बहुओ ने की नेत्रदान की घोषणा।
इस जहां से भी प्यारी है मां की आंखें।


शाहपुरा, 6 जुलाई- देव कृष्ण राज पाराशर।
सिंधी समाज के एक प्परिवार ने 75 वर्षीय दिवंगत माता की आंखे दान कर समर्पण भाव व मानवता का संदेश देते हुए प्रेरणादायी मिसाल कायम की। शाहपुरा निवासी शोभादेवी पत्नी स्व. ईश्वर वासवानी ने अपने जीवन काल में अपने दोनों पुत्रों को मरणोपरांत नेत्र दान करने की मंशा जाहिर की। अंतिम इच्छा को परिजनों ने पूर्ण किया और उनके नेत्रदान कर समाज में मानवता का संदेश दिया। जीवन के अंतिम क्षणों में भी दूसरों के लिए कुछ कर जाने की भावना रखने वाली इस महिला ने यह सिद्ध कर दिया कि सच्चा समर्पण केवल शब्दों में नहीं, कर्म में होता है।
अजमेर से पहुंची टीम: आई बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान, अजमेर की टीम शाहपुरा पहुंची और नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी की। टीम प्रभारी राकेश गुप्ता ने 75 वर्ष की उम्र में भी आंखे के रेटीना की चमक देख अचंभा किया। परिजनों के समर्पण भाव व मानवीय संवेदना प्रकट करते हुए आभार जताया। गुप्ता ने बताया कि इस भावुक क्षण में दिवंगत महिला की अंतिम इच्छा ने जो अलौकिक ज्योति छोड़ी है, वह अनगिनत आंखों में आशा की रौशनी बनकर चमकती रहेगी। उन्होंने कहा कि यह उदाहरण न केवल समाज को प्रेरित करेगा, बल्कि नेत्रदान के प्रति जागरूकता का भी संदेश देगा। अंतिम संस्कार में शामिल होने आए लोगों ने भी इस पहल की सराहना की।
समर्पणभाव देखे परिजनों ने भी नेत्रदान का लिया निर्णय: अपनी माता के इस प्रणय व जीवन में लिए इस निर्णय से प्रेरित होकर उनके ज्येष्ठ पुत्र सुरेश चंद्र व हरीश वासवानी (सिंधी) के साथ उनकी दोनों बहुओं किरण व नीलम वासवानी ने भी नेत्रदान की घोषणा के बाद फॉर्म भरवाए। सिंधी समाज में एक नया आदर्श प्रस्तुत किया। यह शाहपुरा के सिंधी समाज में नेत्रदान का पहला मामला है, जो समाज को नई सोच और दिशा प्रदान करेगा।
इस जहां से भी प्यारी है, मां की आंखे: इस जहां से भी प्यारी है, मां की आंखे यह शब्द रुआंसे होते हुए दिवंगत महिला के छोटे पुत्र हरीश ने बताया कि देह त्याग ने से पूर्व मां ने अभिलाषा जताई कि मेरे जाने के बाद ये आंखे जीवित रहना चाहिए क्योंकि ये दो आंखे किसी दो जरूरतमंदों या नेत्रहीनो के जीवन की रोशनी बनेगी और ये आंखे पुनः किसी को रंगीन दुनिया को दिखा पाएगी।

Dev Krishna Raj Parashar - Shahpura

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