विकास की राह पर पिता के पदचिन्हों पर विधायक रामस्वरूप लाम्बा, जनसेवा के साथ जन्मदिवस मनाएंगे कार्यकर्ता
“राजनीति मेरे लिए केवल पद नहीं, जनसेवा का संकल्प है।” — यह कथन नसीराबाद विधायक रामस्वरूप लाम्बा की सोच और कर्म दोनों को परिभाषित करता है। अपने पिता, पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रो. सांवरलाल जाट की लोकसेवा की विरासत को आगे बढ़ाते हुए, लाम्बा आज भी गांव, गरीब और किसान के बीच न केवल मौजूद हैं, बल्कि विकास की ठोस गाथा भी लिख रहे हैं।
विधायक रामस्वरूप लाम्बा आज अपना जन्मदिवस मना रहे हैं, लेकिन वह इसे केवल उत्सव नहीं, बल्कि “सेवा दिवस” के रूप में देख रहे हैं। भाजपा कार्यकर्ताओं ने फल वितरण, गौसेवा, पौधरोपण और ज़रूरतमंदों की सहायता जैसे सेवा कार्यों के माध्यम से जन्मदिन मनाने की तैयारियां की हैं।
राजनीति में सेवा का व्रत, शिक्षा और संस्कारों से सशक्त नेतृत्व
बीए और एमबीए जैसी डिग्रियों से शिक्षित लाम्बा ने व्यवसायिक पढ़ाई के बाद करीब 15 वर्षों तक अपने पिता की राजनीतिक यात्रा में कदम से कदम मिलाकर अनुभव अर्जित किया। प्रो. जाट के असामयिक निधन के बाद जनता के आग्रह पर लाम्बा ने राजनीति में कदम रखा। उन्होंने लोकसभा उपचुनाव लड़ा और इसके बाद 15वीं व 16वीं विधानसभा में नसीराबाद से विधायक निर्वाचित हुए।
उनकी सरलता, सहजता और सतत उपलब्धता ने उन्हें आमजन का चहेता नेता बना दिया है।
ऐतिहासिक विकास कार्यों से संवारा क्षेत्र का भविष्य
रामस्वरूप लाम्बा के नेतृत्व में नसीराबाद विधानसभा क्षेत्र ने अभूतपूर्व विकास की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। उनके कार्यकाल में किए गए प्रमुख कार्यों में शामिल हैं:
- पीसांगन को नगरपालिका का दर्जा,
- नसीराबाद कृषि उपज मंडी का सशक्तीकरण,
- श्रीनगर में विद्युत विभाग कार्यालय,
- नसीराबाद और मांगलियावास को जोड़ने वाले 20 करोड़ लागत के हाईवे का नवीनीकरण,
- सरकारी स्कूलों का उच्च माध्यमिक में क्रमोन्नयन,
- नवीन पशु चिकित्सालय, विज्ञान संकाय की शुरुआत,
- देवनारायण आवासीय छात्रावास, नसीराबाद और पीसांगन में राजकीय महाविद्यालयों की स्थापना।
ये सारे कार्य नसीराबाद को विकास की मुख्यधारा में लाने के स्पष्ट संकेत हैं।
सेवा ही संकल्प: जन्मदिवस पर अनुकरणीय पहल
रामस्वरूप लाम्बा का जन्मदिवस उनके समर्थकों और क्षेत्रवासियों के लिए एक प्रेरणा का क्षण बन गया है। इस अवसर पर आयोजित सेवा कार्यों की श्रृंखला दर्शाती है कि वे केवल नाम के विधायक नहीं, बल्कि जन भावनाओं के सच्चे प्रतिनिधि हैं।
आज जब राजनीति में दिखावे और प्रचार की होड़ है, तब लाम्बा का यह सेवा मूलक जन्मदिवस एक सकारात्मक संदेश देता है — “राजनीति में सेवा ही असली पूंजी है।”