ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए पहल- आईएएस जोधावत के परिवार ने किया नवाचार,पिता की स्मृति में बनाई लाइब्रेरी, देंगे फ्री किताबें,

ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए पहल- आईएएस जोधावत के परिवार ने किया नवाचार,पिता की स्मृति में बनाई लाइब्रेरी, देंगे फ्री किताबें,
Spread the love

ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए पहल- आईएएस जोधावत के परिवार ने किया नवाचार,पिता की स्मृति में बनाई लाइब्रेरी, देंगे फ्री किताबें,

पिता की स्मृति में बनाई लाइब्रेरी, देंगे फ्री किताबें,

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराएंगे अधिकारी

अजमेर (ARK News)। अजमेर की सीमा से सटे भड़सिया गाँव के रहने वाले दिवंगत आईएएस व शासन सचिव के पद से रिटायर डीआर जोधावत का जीवन एक प्रेरणा है। उनके शब्द, कोई भी व्यक्ति जब अपनी अच्छी स्थिति बनाता है, आर्थिक रूप से या सामाजिक रूप से, तो उसे बैक टू द सोसाइटी कुछ न कुछ काम करना चाहिए…. आज उनकी पत्नी संपतराज, पुत्र रविंद्र जोधावत , पुत्री शशि, डॉ. सीमा और डॉ. प्रियंका जोधावत साकार कर रहे हैं।
वरिष्ठ आरएएस अधिकारी डॉ. प्रियंका संस्कृति शिक्षा विभाग की आयुक्त है। तथा पुत्र रविंद्र जोधावत पंचायत समिति अजमेर ग्रामीण मए एईएन रहै तथा वर्तमान मै पंचायत प्रशिक्षण केंद्र अजमेर में कार्यरत है उन्होंने बताया कि पिता की स्मृति में भड़सिया गाँव के राउमावि में लाइब्रेरी बनाकर दी गई है। यह लाइब्रेरी गाँव के बच्चों को प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी के लिए नि:शुल्क किताबें उपलब्ध कराएगी। मालूम हो कि मूल रूप से भड़सिया के रहने वाले दिवंगत आईएएस जोधावत व उनका परिवार लंबे सयम से अजमेर में बसा है।
….ताकि गाँव के बच्चे शीर्ष पदों तक पहुंचे
आईएएस जोधावत का गाँव भड़सिया के प्रति लगाव गहरा था। वे बताते थे कि संघर्ष के दिनों में गाँव वालों का प्रोत्साहन और माँ का आशीर्वाद ही उनकी सफलता का आधार बना। डॉ. प्रियंका जोधावत ने कहा कि यह लाइब्रेरी केवल एक भवन नहीं, बल्कि उनके पिता के मूल्यों और आदर्शों का जीवंत प्रतीक है। पिता की इच्छा थी कि गाँव के बच्चे शीर्ष पदों तक पहुंचे। गाँव में संसाधनों की कमी के कारण प्रतिभाएं दबाकर रह जाती है। लाइब्रेरी में बच्चे प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी के लिए नि:शुल्क किताबें प्राप्त कर सकेंगे। लाइब्रेरी केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेगी। गाँव के बच्चों को न केवल किताबें मिलेंगी, बल्कि समय-समय पर प्रशासनिक अधिकारी उनके मार्गदर्शन के लिए आएंगे। इस पहल के तहत अधिकारियों द्वारा कक्षाएं आयोजित की जाएंगी। ताकि बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सही दिशा मिले। इसके साथ ही आर्थिक तंगी किसी भी प्रतिभाशाली बच्चे के सपों में बाधा न बने। इसके लिए भविष्य में किताबों से लेकर कोचिंग तक का खर्च वहन करने की योजना है। इस मुहिम में ज्यादा से ज्यादा अधिकारियों को जोडऩे का प्रयास किया जा रहा है।
काव्य संग्रह और कई पुस्तकें लिखीं:- प्रियंका बताती हैं कि पिता डीआर जोधावत ने नागौर, किशनगढ़ और अजमेर में प्रारंभिक और स्नानकोत्तर शिक्षा प्राप्त कर राजकीय कॉलेज में इतिहास व्याख्याता के रूप में अध्यापन कार्य किया। फिर 1975 में राजस्थान प्रशासनिक सेवा अधिकारी के रूप पदभार संभाला। 2006 को शासन सचिव के पद से रिटायर हुए। उनका काव्य संग्रह ‘जीवन सुंदर’ और ‘मेघऋषि’ की संतानों, अपनी ताकत की पहचानों अनुपम कृतियां है। साथ ही जोधावत ने ‘मेरा घूमणिया जीवन’, ‘मेरा बालचर जीवन’, ‘अपनी ताकत आप बनो तुम’, ‘शिक्षा विकास में छात्रावासों का योगदान’ , ‘समाज चेतना में सामाजिक संस्थाओं का योगदान’ समेत कई किताबें लिखीं।

admin - awaz rajasthan ki

Related articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *