शाहपुरा में जीएम सीड योजना के खिलाफ किसानों का विरोध।


स्वास्थ्य, पर्यावरण और धरती को खतरा।
प्रधानमंत्री को पत्र।
अमेरिका पर किसानों का सीधा आरोप।
शाहपुरा, 8 सितंबर 2025। राजस्थान में आनुवंशिक रूप से संशोधित (जीएम) बीजों की योजना ने किसानों के बीच तीव्र विरोध को जन्म दिया है। सोमवार को शाहपुरा में सैकड़ों किसानों ने केंद्र सरकार के जीएम बीजों और फसलों के व्यावसायिक उपयोग को बढ़ावा देने के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन किया।
भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में किसानों ने स्वास्थ्य, पर्यावरण और जमीनों पर खतरे का हवाला देते हुए इस योजना को क्षेत्र की धरती के लिए घातक बताया।
भारतीय किसान संघ के प्रांत उपाध्यक्ष सोहनलाल माली ने पत्रिका से बातचीत में कहा कि जीएम बीज एक बार बोने के बाद दोबारा उगाने योग्य नहीं होते, जिससे जमीन की उर्वरता घटती है। उन्होंने इसे विदेशी साजिश करार देते हुए अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह भारत के पारंपरिक बीजों को नष्ट कर देश को अपने बीजों पर निर्भर करना चाहता है। माली ने बताया कि जीएम बीज महंगे होने के कारण किसानों की आर्थिक स्थिति को और कमजोर करेंगे, जबकि पारंपरिक बीजों को किसान अगली फसल के लिए बचा लेते थे।
पीएम के नाम ज्ञापन:- किसानों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम अतिरिक्त जिला कलक्टर ओम प्रकाश को ज्ञापन सौंपा। , भारतीय किसान संघ के प्रांत उपाध्यक्ष सोहनलाल माली, धर्मीचंद जाट, रमेश चंद्र बोहरा, गणपत सिंह, गोपाल बलाई, भूरालाल आदि शामिल थे। झालावाड़ में आंदोलन का हिस्सा बनेंगे किसान:- उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जीएम सीड योजना को वापस नहीं लिया, तो शाहपुरा क्षेत्र के किसान झालावाड़ में 8 सितंबर से जीएम सीड योजना को लेकर राज्यस्तरीय आंदोलन में हम भाग लेंगे।
जीएम सीड क्या है:- जेनेटिकली मोडिफाइड सीड्स में जेनेटिक इंजीनियरिंग द्वारा पौधों के डीएनए में बदलाव किया जाता है, जिससे उत्पादकता बढ़ती है और कीट-रोग कम लगते हैं। हालांकि, यह पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है और मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है।