होटल मेरवाड़ा एस्टेट को एनजीटी की क्लीन चिट, याचिका को आधारहीन बताते हुए खारिज किया
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की सेन्ट्रल जोन भोपाल बेंच ने होटल मेरवाड़ा एस्टेट के खिलाफ दायर याचिका को रविवार को खारिज कर दिया। याचिका को तथ्यों को छिपाकर और बदनीयती से प्रस्तुत किया गया पाया गया। जस्टिस शिवकुमार सिंह और जस्टिस सुधीर कुमार चतुर्वेदी की बेंच ने कहा कि याचिका का उद्देश्य होटल संचालकों को अनावश्यक परेशान करना था।
भारतीय पब्लिक लेबर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबूलाल साहू द्वारा दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि होटल का निर्माण बिना अनुमति हुआ है और यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षित क्षेत्र में आता है। इसके अलावा, उन्होंने दावा किया कि वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से अनुमति नहीं मिली है और नो-कन्स्ट्रक्शन जोन होने के बावजूद होटल एवं समारोह स्थल का संचालन हो रहा है।
एनजीटी ने अजमेर कलेक्टर और स्टेट पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की संयुक्त जांच कमेटी गठित की, जिसने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि होटल का निर्माण वैध है और पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन नहीं हुआ। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि होटल संचालन के लिए सभी आवश्यक अनुमतियां ली गई हैं।
होटल के वकील लोकेन्द्र सिंह कच्छावा ने बताया कि होटल नो-कन्स्ट्रक्शन जोन से बाहर है और पर्यावरण संरक्षण के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। संबंधित विभागों ने भी पुष्टि की कि होटल में कोई अवैध गतिविधि नहीं हो रही।
होटल मेरवाड़ा एस्टेट के चेयरमैन सतीश अरोड़ा ने कहा कि यह फैसला सत्य की जीत है और होटल संचालन हमेशा नियमों और पर्यावरण मानकों के अनुसार किया गया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय उन लोगों के लिए सबक है जो झूठे आरोप लगाकर विकास कार्यों को बाधित करना चाहते हैं।