राजस्थान में लोकसभा सीटों में 50% बढ़ोतरी की संभावना, विधानसभा सीटें 304 तक पहुंच सकती हैं: मदन राठौड़
जयपुर | प्रतीक पाराशर
देश में महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। केंद्र सरकार संसद में ऐसे विधेयक लाने की तैयारी में है, जिनके जरिए महिलाओं को लोकसभा और राज्यसभा में आरक्षण देने के साथ-साथ लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने का रास्ता भी साफ होगा। इसका असर राज्यों पर भी देखने को मिलेगा, जिसमें राजस्थान प्रमुख रूप से शामिल है।
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने इस मुद्दे पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि परिसीमन के बाद राजस्थान विधानसभा की सीटों में करीब 50 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है। उन्होंने अनुमान जताया कि मौजूदा 200 सीटों की संख्या बढ़कर लगभग 304 तक पहुंच सकती है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार “आधी आबादी को पूरा हक” देने के उद्देश्य से “नारी शक्ति वंदन” विधेयक ला रही है, जिससे राजनीति में महिलाओं की भागीदारी और मजबूत होगी।
विपक्ष ने उठाए सवाल
इस बयान को लेकर विपक्ष ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि जब तक परिसीमन आयोग का गठन ही नहीं हुआ है, तब तक सीटों की संख्या और आरक्षण को लेकर इस तरह के दावे करना उचित नहीं है।
उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कौन तय कर रहा है कि कितनी सीटें बढ़ेंगी, कौन सी सीट आरक्षित होगी और किन क्षेत्रों का पुनर्गठन किया जाएगा। जूली ने आरोप लगाया कि इस तरह की चर्चाएं बिना आधिकारिक प्रक्रिया के हो रही हैं, जिससे भ्रम की स्थिति बन रही है।
सीट बढ़ने की चर्चा से बढ़ी हलचल
महिला आरक्षण को लेकर अधिकांश राजनीतिक दलों में सहमति बनती नजर आ रही है, लेकिन इसके साथ ही कई नेताओं में अपनी सीट के आरक्षित होने को लेकर चिंता भी बढ़ रही है।
वहीं, परिसीमन के बाद सीटों की संख्या बढ़ने की संभावना को कुछ नेता नए अवसर के रूप में देख रहे हैं। माना जा रहा है कि यदि सीटों में इजाफा होता है तो कई नए क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व मिलेगा और राजनीतिक समीकरण भी बदल सकते हैं।