Rajasthan Panchayat Development Report: 5592 पंचायतों की हालत खराब, पानी और महिला-बाल विकास में पिछड़ा प्रदेश
JAIPUR | PRATEEK PARASHAR
राजस्थान में पंचायत चुनावों की चर्चा के बीच पंचायतों की जमीनी हकीकत को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। पंचायत विकास सूचकांक (Panchayat Development Index – PDI) की रिपोर्ट में सामने आया है कि प्रदेश की 5592 ग्राम पंचायतों की स्थिति बेहद खराब है। रिपोर्ट के अनुसार इन पंचायतों में न तो पर्याप्त पेयजल उपलब्ध है और न ही महिला एवं बच्चों के अनुकूल सुविधाएं विकसित हो पाई हैं।
केंद्रीय पंचायतीराज मंत्रालय द्वारा जारी इस रिपोर्ट में राजस्थान की 11037 पंचायतों का मूल्यांकन किया गया। इनमें से 11029 पंचायतें “विकसित पंचायत” की श्रेणी में नहीं आ सकीं। केवल 8 पंचायतें ही सभी 9 विकास सूचकांकों पर खरी उतरी हैं।
पानी, स्वास्थ्य और महिला सुरक्षा में पिछड़ी पंचायतें
रिपोर्ट के मुताबिक पंचायतों का मूल्यांकन 9 प्रमुख मानकों पर किया गया, जिनमें गरीबी मुक्त एवं उन्नत आजीविका, स्वस्थ पंचायत, बाल हितैषी पंचायत, जल समृद्ध पंचायत, स्वच्छ एवं हरित पंचायत, सामाजिक रूप से सुरक्षित पंचायत और महिला हितैषी पंचायत जैसे पैरामीटर शामिल थे।
सबसे ज्यादा चिंता की बात यह रही कि प्रदेश की बड़ी संख्या में पंचायतें जल संकट, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और महिला-बाल कल्याण जैसे बुनियादी क्षेत्रों में पिछड़ी हुई पाई गईं।
केवल 8 पंचायतें बनीं मॉडल
प्रदेश में केवल 8 पंचायतें ही ऐसी रहीं जो सभी 9 सूचकांकों में खरी उतरीं। वहीं 4 हजार से अधिक पंचायतें सामाजिक रूप से सुरक्षित श्रेणी में जरूर आईं, लेकिन समग्र विकास के मामले में अधिकांश पंचायतों का प्रदर्शन कमजोर रहा।
रिपोर्ट के अनुसार:
5389 पंचायतें “कैटेगरी-C” में शामिल हुईं
5437 पंचायतें “कैटेगरी-B” में रहीं
केवल 203 पंचायतें “कैटेगरी-A” तक पहुंच सकीं
उदयपुर जिला बना टॉप परफॉर्मर
पंचायत विकास सूचकांक में उदयपुर जिले का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा। जिले की कई पंचायतों ने सामाजिक सुरक्षा, स्वच्छता और महिला सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन किया।
वहीं कई जिलों में पानी, शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है।
पंचायत चुनाव से पहले बढ़ा मुद्दा
राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा 31 जुलाई तक पंचायत और निकाय चुनाव कराने के आदेश के बाद यह रिपोर्ट राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विपक्ष अब पंचायतों की बदहाल स्थिति को बड़ा चुनावी मुद्दा बना सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पंचायत विकास सूचकांक की यह रिपोर्ट ग्रामीण राजस्थान की वास्तविक तस्वीर सामने लाती है और यह संकेत देती है कि केवल योजनाओं की घोषणा नहीं, बल्कि जमीन पर प्रभावी क्रियान्वयन की भी जरूरत है।