अमृत काल में राजस्थान विधानसभा: वासुदेव देवनानी के नेतृत्व में बदल रही सदन की तस्वीर
डिजिटल विधानसभा से लेकर नवाचारों तक, अध्यक्ष देवनानी के कार्यकाल में नई पहचान बना रहा राजस्थान का सदन
जयपुर। राजस्थान विधानसभा अपने 75 वर्षों के गौरवशाली सफर के अमृत काल में प्रवेश कर चुकी है। लोकतंत्र की इस ऐतिहासिक यात्रा को नई दिशा देने में वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की भूमिका विशेष रूप से चर्चा में है।
राजस्थान विधानसभा ने जहां नरोत्तम लाल जोशी से लेकर कई अनुभवी अध्यक्षों का कार्यकाल देखा है, वहीं देवनानी के नेतृत्व में सदन में तकनीक, संस्कृति और नवाचार का नया अध्याय जुड़ा है।
अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने विधानसभा को आधुनिक और डिजिटल स्वरूप देने की दिशा में कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। पेपरलेस विधानसभा, प्रत्येक विधायक की सीट पर आईपैड की व्यवस्था, डिजिटल म्यूजियम का उन्नयन, हर्बल वाटिका और कारगिल शौर्य वाटिका जैसी पहलें उनके कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियां हैं।
विधानसभा परिसर में राजस्थान की संस्कृति और इतिहास को दर्शाने के लिए सदन के द्वारों का नामकरण, नव संवत्सर से विधानसभा डायरी की शुरुआत और विधानसभा परिसर के सौंदर्यीकरण जैसे प्रयासों ने भी नई पहचान बनाई है।
देवनानी के कार्यकाल में विधानसभा के वातावरण में भी बदलाव देखने को मिला है। सदन के कारपेट का रंग हरे से गुलाबी किया गया, जो राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा एक विशेष प्रयोग माना गया।
75 वर्षों की इस यात्रा में राजस्थान विधानसभा ने कई ऐतिहासिक क्षण देखे हैं। इसी सदन से निकले भैरों सिंह शेखावत और जगदीप धनखड़ देश के उपराष्ट्रपति पद तक पहुंचे, जबकि ओम बिरला लोकसभा अध्यक्ष बने।
अब अमृत काल में राजस्थान विधानसभा अपनी लोकतांत्रिक विरासत को आधुनिक तकनीक और नई सोच के साथ आगे बढ़ा रही है। वासुदेव देवनानी के नेतृत्व में सदन की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, डिजिटल और जनोन्मुख बनाने की दिशा में लगातार प्रयास जारी हैं।
लोकतंत्र की विरासत को आगे बढ़ा रही विधानसभा
राजस्थान विधानसभा का यह सफर केवल राजनीतिक घटनाओं का इतिहास नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों, जनप्रतिनिधित्व और सामाजिक परिवर्तन की यात्रा भी है।
यह वही विधानसभा है जहां पहली बार विधायक बने भजनलाल शर्मा मुख्यमंत्री बनकर सदन के नेता बने। वहीं, सदन में उत्कृष्ट वक्ताओं को सम्मानित करने और विपक्ष-सत्ता पक्ष के अच्छे भाषणों की सराहना करने जैसी परंपराएं भी रही हैं।
अमृत महोत्सव के उद्घाटन सत्र में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला मुख्य अतिथि होंगे, जबकि समापन समारोह में राज्यसभा के सभापति और भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
75 वर्षों की यह यात्रा राजस्थान विधानसभा को देश की लोकतांत्रिक विरासत के महत्वपूर्ण अध्यायों में शामिल करती है।