किशाऊ परियोजना पर छह राज्यों के बीच MoA, राजस्थान को मिलेगा बड़ा फायदा; शेखावाटी की पानी की समस्या होगी दूर
जयपुर। राजस्थान के लिए जल प्रबंधन के क्षेत्र में आज अहम दिन रहा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों ने किशाऊ परियोजना के लिए समझौता ज्ञापन (MoA) पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते को राजस्थान सहित संबंधित राज्यों के लिए जल उपलब्धता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इस अवसर पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग के सचिव तथा संबंधित राज्यों के मुख्य सचिव भी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रधानमंत्री मोदी का जताया आभार
समझौते के बाद राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वर्षों से अटकी योजनाओं को आगे बढ़ाने का काम हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान के लोग सौभाग्यशाली हैं, क्योंकि प्रदेश लंबे समय से पानी की समस्या का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि छह राज्यों के बीच हुआ यह बड़ा समझौता राजस्थान में सिंचाई और पेयजल की समस्या के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।
राजस्थान को मिलेगा 130 MCM पानी
किशाऊ बांध परियोजना के तहत राजस्थान को वर्षभर करीब 130 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) पानी मिलने की उम्मीद है। इससे शेखावाटी क्षेत्र के तीन जिलों की पेयजल और सिंचाई संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
यमुना जल समझौते के तहत प्रस्तावित जलापूर्ति लाइनों के माध्यम से शेखावाटी क्षेत्र तक पानी पहुंचाया जाएगा। इससे क्षेत्र में पेयजल की उपलब्धता बढ़ने के साथ कृषि और सिंचाई व्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
किशाऊ परियोजना को लेकर हुए इस MoA को राजस्थान के लिए दीर्घकालिक जल सुरक्षा की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। खास तौर पर शेखावाटी क्षेत्र में पानी की समस्या से राहत की उम्मीद बढ़ी है।
जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत का बयान
रावत ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का आभार जताते हुए कहा कि किशाऊ परियोजना राजस्थान के लिए ऐतिहासिक कदम है। इससे प्रदेश की वर्षों पुरानी पानी की समस्या के समाधान में बड़ी मदद मिलेगी और शेखावाटी क्षेत्र को पेयजल व सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सकेगा।