अजमेर मेयर चुनाव: कांग्रेस से किरण गढ़वाल भरेंगी नामांकन, OBC महिला चेहरे पर दांव; क्या बदलेगा चुनावी समीकरण?
अजमेर। अजमेर नगर निगम के मेयर चुनाव में सियासी तस्वीर अब और दिलचस्प होती जा रही है। भारतीय जनता पार्टी के बाद अब कांग्रेस की ओर से भी प्रत्याशी का नाम लगभग तय माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस की ओर से किरण गढ़वाल मेयर पद के लिए नामांकन दाखिल करेंगी।किरण गढ़वाल को OBC महिला चेहरे के तौर पर मैदान में उतारने की चर्चा ने चुनाव को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है। अजमेर नगर निगम में मेयर पद सामान्य महिला (General Female) के लिए आरक्षित है। ऐसे में कांग्रेस का OBC महिला चेहरे पर दांव लगाना स्थानीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। अब सवाल यह है कि कांग्रेस का यह फैसला किस तरह चुनावी समीकरणों को प्रभावित करेगा और क्या पार्टी इस रणनीति के जरिए पार्षदों के बीच अपनी पकड़ मजबूत कर पाएगी।भाजपा पहले ही वार्ड नंबर 3 से पार्षद अनामिका शर्मा को अपना उम्मीदवार घोषित कर चुकी है। भाजपा शहर अध्यक्ष रमेश सोनी ने अनामिका शर्मा का नामांकन अजमेर नगर निगम कार्यालय में प्रस्तुत किया है।OBC महिला चेहरे पर कांग्रेस का दांवकिरण गढ़वाल के नाम की चर्चा के बाद कांग्रेस की रणनीति को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। सामान्य महिला के लिए आरक्षित मेयर पद पर OBC महिला पार्षद को उम्मीदवार बनाए जाने को पार्टी की चुनावी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।कांग्रेस का यह फैसला कितना प्रभावी साबित होगा, इसका जवाब मतदान के बाद ही मिलेगा। फिलहाल पार्टी के सामने अपने पार्षदों के साथ-साथ निर्दलीय पार्षदों का समर्थन जुटाने की चुनौती है।37 कांग्रेस, 32 भाजपा और 11 निर्दलीयअजमेर नगर निगम के 80 वार्डों में कांग्रेस के 37 पार्षद, भाजपा के 32 पार्षद और 11 निर्दलीय पार्षद निर्वाचित हुए हैं। मेयर पद के लिए बहुमत का आंकड़ा 41 है।संख्या बल के लिहाज से कांग्रेस बहुमत से चार कदम दूर है, जबकि भाजपा को बहुमत के लिए अपने मौजूदा 32 पार्षदों के अलावा कम से कम 9 अतिरिक्त समर्थन की जरूरत होगी। ऐसे में 11 निर्दलीय पार्षद चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।दोनों खेमों के अपने-अपने दावेकांग्रेस की ओर से कुछ निर्दलीय पार्षदों के समर्थन का दावा किया जा रहा है। दूसरी ओर भाजपा भी पर्याप्त समर्थन जुटाने का दावा कर रही है। हालांकि दोनों दलों के दावों की वास्तविक स्थिति मतदान के दौरान ही स्पष्ट होगी।मेयर चुनाव को लेकर दोनों पार्टियां अपने पार्षदों को एकजुट रखने में जुटी हैं। पार्षदों की बाड़ेबंदी और उन्हें अलग-अलग स्थानों पर रखने की चर्चाओं ने भी चुनावी माहौल को गरमा दिया है।क्या अजमेर दक्षिण को मिलेगा लंबे इंतजार के बाद मेयर?किरण गढ़वाल के नाम के सामने आने के साथ ही अजमेर की स्थानीय राजनीति में एक और सवाल चर्चा में है—क्या अजमेर दक्षिण क्षेत्र को लंबे समय बाद मेयर पद का प्रतिनिधित्व मिलेगा?किरण गढ़वाल के मैदान में उतरने से क्षेत्रीय समीकरणों को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि उनका उम्मीदवार बनना क्षेत्रीय राजनीति की दिशा बदल देगा। अंतिम तस्वीर नामांकन प्रक्रिया, पार्षदों के समर्थन और मतदान के परिणाम से ही साफ होगी।अब मुकाबला केवल भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों के बीच नहीं, बल्कि 41 के जादुई आंकड़े तक पहुंचने की राजनीतिक कवायद का भी है। सामान्य महिला के लिए आरक्षित पद पर भाजपा के सामान्य महिला चेहरे और कांग्रेस के OBC महिला चेहरे के बीच मुकाबला अजमेर की स्थानीय राजनीति में कई नए सवाल खड़े कर रहा है।कौन सा दांव किस पर भारी पड़ेगा, कौन से निर्दलीय किस खेमे के साथ जाएंगे और क्या अजमेर दक्षिण को लंबे समय बाद मेयर पद का प्रतिनिधित्व मिलेगा—इन सवालों के जवाब अब मेयर चुनाव के नतीजे ही देंगे।