पंचायतीराज चुनाव कब होंगे?दूल्हे तैयार, बाराती तैयार… बस फेरे के मुहूर्त का इंतजार!

पंचायतीराज चुनाव कब होंगे?दूल्हे तैयार, बाराती तैयार… बस फेरे के मुहूर्त का इंतजार!
Spread the love

पंचायतीराज चुनाव कब होंगे?
दूल्हे तैयार, बाराती तैयार… बस फेरे के मुहूर्त का इंतजार!
अजमेर।

ग्रामीण राजस्थान में इन दिनों एक ही सवाल बार-बार सुनाई दे रहा है—पंचायतीराज चुनाव कब होंगे? होंगे भी या फिर आगे खिसकेंगे? आखिर चुनाव की तारीखों को लेकर तस्वीर साफ क्यों नहीं हो रही?
ग्रामीण इलाकों में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे दावेदारों की स्थिति कुछ ऐसी हो गई है कि दूल्हे तैयार बैठे हैं, बाराती भी सज-धजकर तैयार हैं, लेकिन पंडित जी की ओर से फेरे का मुहूर्त अभी तक नहीं निकला है। यही वजह है कि गांव की चौपाल से लेकर चाय की थड़ी तक चुनावी चर्चा लगातार जारी है।

“दूल्हा तैयार, बारात तैयार,
मतदाता भी हैं बिल्कुल तैयार,
बस तारीख का मुहूर्त नहीं,

दरअसल पंचायतीराज चुनाव ग्रामीण क्षेत्र के लगभग हर मतदाता से सीधे जुड़े हुए हैं। पंचायत सदस्य से लेकर सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, प्रधान और जिला परिषद सदस्य तक के चुनाव का इंतजार लंबे समय से किया जा रहा है। जनवरी 2026 में होने वाले चुनाव अब तक नहीं हो सके हैं। सरकार की ओर से ‘एक राज्य, एक चुनाव’ की व्यवस्था के तहत पूरे प्रदेश में पंचायतीराज चुनाव एक साथ कराने की बात कही जाती रही है।
कोर्ट के निर्देश के बाद शुरू हुई थी प्रक्रिया
पंचायतीराज चुनाव को लेकर न्यायालय के निर्देशों के बाद सरकार ने चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ाई थी। आरक्षण की लॉटरी की तारीख भी तय की गई, लेकिन अचानक आदेश जारी कर आरक्षण की लॉटरी को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया गया। इसके बाद एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में चुनाव को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई।
अब सवाल यह है कि आरक्षण की नई तारीख कब घोषित होगी और चुनाव कार्यक्रम कब जारी होगा?
न्यायालय के निर्देशों के अनुसार चुनाव प्रक्रिया 15 नवम्बर से पहले पूरी किए जाने की समय-सीमा महत्वपूर्ण है। इसी बीच नगरीय निकाय चुनाव की प्रक्रिया भी चल रही है। पार्षदों के चुनाव के बाद अब अध्यक्ष, सभापति, मेयर, उपाध्यक्ष, उपसभापति और डिप्टी मेयर सहित अन्य प्रक्रियाएं पूरी होनी हैं।

25 सितम्बर के बाद तेज हो सकती है पंचायतीराज की कवायद!

राजनीतिक एवं प्रशासनिक हलकों में लगाए जा रहे कयासों के अनुसार यदि नगरीय निकायों की शेष चुनावी प्रक्रिया सितंबर के अंतिम सप्ताह तक पूरी होती है तो 25 सितम्बर के बाद पंचायतीराज चुनाव की कवायद तेज हो सकती है।
ऐसी स्थिति में सितंबर के अंतिम सप्ताह में जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य, प्रधान, सरपंच और वार्ड पंचों के आरक्षण की लॉटरी निकाले जाने की संभावना पर चर्चा है।
जिला परिषद सदस्य एवं प्रधान की आरक्षण लॉटरी जिला स्तर पर तथा पंचायत समिति सदस्य, सरपंच एवं वार्ड पंच की लॉटरी उपखंड स्तर पर निकाले जाने की व्यवस्था हो सकती है।
हालांकि इन तारीखों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अक्टूबर में चुनाव, नवम्बर में परिणाम की संभावना पर चर्चा
नवम्बर में दीपावली जैसे बड़े पर्व को देखते हुए यदि चुनाव कार्यक्रम इसी समय-सीमा में आगे बढ़ता है तो निर्वाचन विभाग के सामने अक्टूबर में मतदान प्रक्रिया पूरी करने की चुनौती होगी।
चुनावी चर्चाओं में पंचायतीराज चुनाव चार चरणों में कराए जाने की संभावना जताई जा रही है। कुछ कयासों में प्रथम चरण 16 अक्टूबर, दूसरा 20 अक्टूबर, तीसरा 24 अक्टूबर तथा अंतिम चरण 26 अक्टूबर के आसपास होने की बात कही जा रही है।
लेकिन यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये संभावित तारीखें हैं, निर्वाचन विभाग की अधिकृत घोषणा नहीं। अलग-अलग जिलों और पंचायत समितियों के लिए मतदान की तारीखें अलग भी हो सकती हैं।
संभावित व्यवस्था के अनुसार जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव ईवीएम से तथा सरपंच एवं वार्ड पंच के चुनाव मतपत्र से कराए जाने की चर्चा है। जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों की मतगणना जिला मुख्यालय पर तथा सरपंच-वार्ड पंच की मतगणना मतदान के बाद संबंधित स्तर पर किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
दीपावली से पहले चुनाव या फिर नई तारीख?
यही सबसे बड़ा सवाल है।
यदि अक्टूबर में मतदान हो जाता है और जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्यों के परिणाम बाद में घोषित किए जाते हैं, तो नवम्बर में जिला प्रमुख, उप जिला प्रमुख, प्रधान, उप प्रधान तथा विभिन्न समितियों के चुनाव कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
यानी पूरा चुनावी कैलेंडर अब सितंबर के अंतिम सप्ताह से लेकर नवंबर के मध्य तक की समय-सीमा के बीच सिमटता नजर आ सकता है।

“लॉटरी की तारीख का इंतजार,
चुनाव कार्यक्रम का इंतजार,
नेता जी की तैयारी पूरी,
अब जनता पूछे—कब बनेगी नेताजी की सरकार?”

अब सबकी नजर आरक्षण लॉटरी पर

फिलहाल सरकार की ओर से आरक्षण लॉटरी की नई तारीख और निर्वाचन विभाग की ओर से पंचायतीराज चुनाव का आधिकारिक कार्यक्रम सामने नहीं आया है। ऐसे में चुनाव लड़ने वाले संभावित उम्मीदवारों के साथ-साथ ग्रामीण मतदाताओं की निगाहें भी सरकार और निर्वाचन विभाग की अगली घोषणा पर टिकी हैं।
कहावत है—“इंतजार की घड़ी सबसे लंबी होती है।” पंचायतीराज चुनाव के मामले में यह कहावत ग्रामीण राजस्थान पर बिल्कुल फिट बैठ रही है।
अब देखना यह है कि आरक्षण की लॉटरी का नया मुहूर्त कब निकलता है और ग्रामीण राजस्थान में चुनावी बिगुल कब बजता है।
फिलहाल हालात यही हैं—
“उम्मीदवारों ने पगड़ी संभाल रखी है,
मतदाताओं ने मन बना रखा है,
चुनावी मैदान भी तैयार है,
बस निर्वाचन विभाग ने तारीख वाला पन्ना अभी पलटा नहीं है!”

admin - awaz rajasthan ki

Related articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *