कांग्रेस में प्रचंड बहुमत के बाद भी फंसा पेच-एक पार्षद के निर्दलीय पर्चे ने बढ़ाई धड़कनें, आलाकमान की नींद उड़ी।
कुर्सी के लिए कांग्रेस में बगावत के सुर तेज होने से भाजपा ताक में।
तोषनीवाल और सेन की जंग में फंसा अध्यक्ष पद का ताज
शाहपुरा 16 सितंबर 2026- राजेंद्र पाराशर। नगर पालिका चुनाव में 22 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत हासिल करने के बाद भी शाहपुरा में कांग्रेस के लिए अगला पालिका अध्यक्ष चुनना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है। 35 वार्डों वाली पालिका में कांग्रेस को स्पष्ट जनादेश मिला है, जहां कांग्रेस के 22, भाजपा के 8 और 5 निर्दलीय प्रत्याशी जीते हैं। लेकिन, बुधवार को नामांकन भरने के बाद कांग्रेस में उभरी गुटबाजी ने पार्टी के शीर्ष नेताओं की नींद उड़ा दी है।
अध्यक्ष पद के लिए बुधवार को तीन पार्षदों ने चार नामांकन दाखिल किए, जिसके बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस से दो नेता पूर्व नगर अध्यक्ष बालमुकुंद तोषनीवाल और 5 बार के पार्षद रह चुके व पूर्व नगर अध्यक्ष रमेश सेन पालिका अध्यक्ष पद पर दावेदारी ठोक रहे हैं और दोनों इगो, हट को लेकर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
राजनीतिक माहौल तब और गरमा गया जब बालमुकुंद तोषनीवाल ने कांग्रेस के साथ-साथ निर्दलीय के रूप में भी पर्चा दाखिल कर दिया। इस कदम से साफ संकेत मिलते हैं कि सिंबल न मिलने की स्थिति में वे निर्दलीय ही मैदान में उतरेंगे। चर्चाओं का बाजार गर्म है कि तोषनीवाल निर्दलीयों और कुछ असंतुष्ट कांग्रेस पार्षदों के सहारे भाजपा के साथ मिलकर जीत का समीकरण बना सकते हैं।
दूसरी ओर रमेश सेन का पलड़ा भी मजबूत माना जा रहा है, जिन्होंने पूर्व प्रत्याशी नरेंद्र रेगर के साथ मिलकर टिकट वितरण में अहम भूमिका निभाई थी। लेकिन क्या सेन अपने खेमे को एकजुट रख पाएंगे या तोषनीवाल सेंधमारी करने में सफल होंगे, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।
कांग्रेस की इस अंदरूनी खींचतान का फायदा उठाने के लिए भाजपा भी सतर्क हो गई है। मात्र 8 सीटों के बावजूद भाजपा की ललिता कहार की दावेदारी से मुकाबला त्रिकोणीय नजर आ रहा है। यदि दोनों दावेदारों का इगो आड़े आया, तो भाजपा निर्दलीयों और कांग्रेसी असंतुष्टों के दम पर बाजी मार सकती है। फिलहाल सभी की नजरे आलाकमान के फैसले और गुरवार को नामांकन वापसी के अंतिम समय पर टिकी हैं। नगर के गली, मोहल्ले चौराहों पर गुटों में जमा लोगों के बीच दिनभर जोरदार चर्चा का विषय बना हुआ है।