अजमेर में पंचायत चुनाव के नतीजों ने बदले सियासी समीकरण, कहीं परिवारों की विरासत कायम तो कहीं नए चेहरों को मौका

अजमेर में पंचायत चुनाव के नतीजों ने बदले सियासी समीकरण, कहीं परिवारों की विरासत कायम तो कहीं नए चेहरों को मौका
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अजमेर। पंचायत राज आम चुनाव 2026 के दूसरे चरण के नतीजों में ग्रामीण क्षेत्रों की राजनीति के कई रंग देखने को मिले। कहीं वर्षों से पंचायतों में प्रभाव रखने वाले परिवारों की राजनीतिक पकड़ बरकरार रही, तो कहीं मतदाताओं ने नए चेहरों को जिम्मेदारी सौंपी। कई पंचायतों में चुनावी मुकाबला राजनीतिक परिवारों की प्रतिष्ठा से जुड़ा रहा। भाजपा के स्थानीय पदाधिकारियों की पत्नियों ने सरपंच पद पर जीत दर्ज की, वहीं कुछ पंचायतों में पूर्व सरपंचों और राजनीतिक रूप से सक्रिय परिवारों को हार का सामना करना पड़ा।

पुष्कर ग्रामीण क्षेत्र की नाड़ा, खोरी, होकरा, गोवलिया किशनपुरा, तिलोरा, बडलिया, बासेली और देवनगर पंचायतों के नतीजों में पारिवारिक राजनीतिक पृष्ठभूमि, संगठनात्मक जुड़ाव और प्रत्याशियों के व्यक्तिगत जनसंपर्क की चर्चा रही। चुनाव परिणामों ने यह भी दिखाया कि पंचायत स्तर पर स्थानीय मुद्दे और प्रत्याशियों का अपना प्रभाव मुकाबले को प्रभावित करते हैं।

नाड़ा में 919 वोटों से जीत, पुराने राजनीतिक परिवार को झटका

नाड़ा पंचायत में ओमप्रकाश रावत ने सुरेंद्र सिंह रावत को 919 मतों से हराया। इस जीत को पुष्कर ग्रामीण क्षेत्र के बड़े अंतर वाले परिणामों में गिना जा रहा है। सुरेंद्र सिंह के परिवार का लंबे समय से पंचायत राजनीति में प्रभाव रहा है, लेकिन इस बार चुनाव परिणाम उनके पक्ष में नहीं रहे।

खोरी और होकरा में भाजपा पदाधिकारियों के परिवारों को मिली जिम्मेदारी

खोरी पंचायत में भाजपा बूढ़ा पुष्कर मंडल अध्यक्ष शक्ति सिंह राठौड़ की पत्नी लकी शेखावत ने सरपंच पद का चुनाव जीता। उन्होंने संतु देवी चौधरी को 227 मतों से पराजित किया।

वहीं, कानस पंचायत से अलग होकर बनी नवगठित होकरा पंचायत में भाजपा बूढ़ा पुष्कर मंडल महामंत्री त्रिलोक सिंह रावत की पत्नी पूजा रावत सरपंच निर्वाचित हुईं। वह इस पंचायत की पहली सरपंच बनी हैं।

गोवलिया किशनपुरा में दो पूर्व सरपंचों के परिवारों के बीच मुकाबला

तिलोरा से अलग होकर बनी गोवलिया किशनपुरा पंचायत में पुराने राजनीतिक परिवार को हार का सामना करना पड़ा। गुमान सिंह रावत की पत्नी प्रेमी देवी ने भाजपा के वरिष्ठ नेता समुद्र सिंह रावत की पत्नी गोपाली देवी को 69 मतों से हराया।

गोपाली देवी दो बार तिलोरा की सरपंच रह चुकी हैं, जबकि उनके पति समुद्र सिंह रावत तीन बार सरपंच रहे हैं। जीत के साथ प्रेमी देवी नवगठित पंचायत की पहली सरपंच बनीं।

तिलोरा में जगमाल गुर्जर ने 418 मतों से दर्ज की जीत

तिलोरा पंचायत में युवा प्रत्याशी जगमाल गुर्जर ने सीमा रावत को 418 मतों से पराजित किया। चुनाव परिणाम में उन्हें विभिन्न समाजों से समर्थन मिलने की चर्चा रही। इस जीत के साथ उन्होंने पंचायत की जिम्मेदारी संभालने का रास्ता बनाया।

बडलिया में पूर्व सरपंच परिवार का दबदबा बरकरार

बडलिया पंचायत में निवर्तमान सरपंच अभय सिंह पंवार के परिवार को फिर जीत मिली। उनकी पत्नी पिंकी रावत ने सरपंच पद का चुनाव जीतकर परिवार की राजनीतिक स्थिति बरकरार रखी।

बासेली में 11 प्रत्याशियों के बीच रोहित सैनी ने मारी बाजी

बासेली पंचायत में सरपंच पद के लिए 11 प्रत्याशियों के बीच मुकाबला हुआ। इसमें रोहित सैनी ने निवर्तमान पंचायत समिति सदस्य हंसराज वैष्णव को हराकर जीत हासिल की।

15 साल के संघर्ष के बाद देवनगर में ओमप्रकाश गुर्जर को मिली जीत

देवनगर पंचायत में देव सेना के पुष्कर विधानसभा अध्यक्ष ओमप्रकाश गुर्जर ने निवर्तमान सरपंच मदनलाल गुर्जर को 563 मतों से हराया। ओमप्रकाश गुर्जर पिछले करीब 15 वर्षों से पंचायत क्षेत्र की समस्याओं को लेकर सक्रिय रहे हैं। इस बार चुनाव में उन्हें जीत मिली और वे सरपंच निर्वाचित हुए।

चुनाव परिणामों में दिखे स्थानीय समीकरण

दूसरे चरण के इन नतीजों में कहीं राजनीतिक परिवारों की अगली पीढ़ी और पारिवारिक सदस्य पंचायत की जिम्मेदारी संभालते नजर आए, तो कहीं मतदाताओं ने नए प्रत्याशियों को अवसर दिया। इन परिणामों ने स्पष्ट किया कि पंचायत चुनाव में संगठन और पारिवारिक पहचान के साथ स्थानीय जनसंपर्क, मुद्दे और प्रत्याशियों की व्यक्तिगत सक्रियता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

Vijay Kumar Parashar

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