गांवों में पर्यावरण संरक्षण की अलख जगाएगा सात दिवसीय अभियान, आज से होगी शुरुआत
अजमेर। ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के सदुपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिले की सभी ग्राम पंचायतों में 1 नवंबर से सात दिवसीय मिशन लाइफ अभियान शुरू किया जा रहा है। राज्य सरकार की पहल पर 1 से 7 नवंबर तक चलने वाले इस अभियान के तहत ग्रामीणों को अपनी दैनिक जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव अपनाकर पर्यावरण संरक्षण में भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
अभियान के दौरान जिला परिषद, पंचायत समितियों और ग्राम पंचायत स्तर पर विभिन्न जागरूकता गतिविधियां आयोजित होंगी। इनमें जल और बिजली की बचत, प्लास्टिक के उपयोग में कमी, कचरे का उचित निस्तारण और ई-कचरा प्रबंधन जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सरकारी कार्यालयों, स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और सार्वजनिक स्थानों पर भी लोगों को जागरूक किया जाएगा।
हर दिन एक विषय, पर्यावरण संरक्षण का संदेश
अभियान के सात दिनों में अलग-अलग विषयों के माध्यम से ग्रामीणों को जागरूक किया जाएगा।
- 1 नवंबर – स्वस्थ जीवनशैली: योग, स्वच्छता, फिटनेस के साथ पैदल चलने और साइकिल के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा।
- 2 नवंबर – ऊर्जा संरक्षण: अनावश्यक बिजली खर्च रोकने, एलईडी बल्ब और ऊर्जा दक्ष उपकरणों के इस्तेमाल पर जोर रहेगा।
- 3 नवंबर – जल संरक्षण: जल ऑडिट, वर्षा जल संचयन, तालाबों और बावड़ियों की सफाई तथा पानी की गुणवत्ता जांच के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाएगी।
- 4 नवंबर – टिकाऊ खानपान: मोटे अनाज, स्थानीय पौष्टिक भोजन, किचन गार्डन और जैविक खाद को बढ़ावा देने के साथ भोजन की बर्बादी रोकने का संदेश दिया जाएगा।
- 5 नवंबर – प्लास्टिक मुक्त अभियान: सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग कम करने, कचरे को अलग-अलग रखने और उसके उचित निस्तारण के लिए प्रेरित किया जाएगा।
- 6 नवंबर – ई-कचरा प्रबंधन: खराब मोबाइल, बैटरी और कंप्यूटर जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को सामान्य कचरे में नहीं फेंकने तथा अधिकृत रिसाइक्लर तक पहुंचाने की जानकारी दी जाएगी।
- 7 नवंबर – ठोस कचरा प्रबंधन: गीले और सूखे कचरे को अलग रखने, जैविक खाद बनाने, वस्तुओं के पुनः उपयोग और सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता पर जोर रहेगा।
पंचायत स्तर पर जनभागीदारी बढ़ाने की पहल
अभियान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी से पर्यावरण के अनुकूल आदतों को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना है। इसके माध्यम से ग्राम पंचायतों में पर्यावरण संरक्षण और ठोस कचरा प्रबंधन की गतिविधियों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।