मांगलियावास में 24 जुलाई को भरेगा ऐतिहासिक कल्पवृक्ष मेला, तैयारियां अंतिम चरण में
हरियाली अमावस्या के पावन अवसर पर 24 जुलाई को मांगलियावास में ऐतिहासिक कल्पवृक्ष मेला भरेगा। ग्राम पंचायत प्रशासन ने मेले की तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। श्रद्धालुओं में इसे लेकर खासा उत्साह है।
श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र — पवित्र कल्पवृक्ष।
हर साल की तरह इस बार भी हजारों श्रद्धालु राजा, रानी और राजकुमार के पवित्र कल्पवृक्षों की पूजा-अर्चना करेंगे। श्रद्धालु परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल की कामना के लिए विशेष रूप से इस मेले में भाग लेते हैं।
झूलों की स्थापना शुरू, मेले को मिला भव्य रूप।
मेला ग्राउंड में झूले, दुकानें और अन्य मनोरंजन की सामग्री लगाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। यह मेला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि सामाजिक मेलजोल का भी अवसर बनता है।
यातायात व्यवस्था पर विशेष ध्यान।
गुरुवार को सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक भारी वाहनों की आवाजाही पर पूर्ण पाबंदी रहेगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बस स्टैंड के पास टेकरी क्षेत्र में कंट्रोल रूम और खोया-पाया केंद्र स्थापित किया जाएगा।
प्रशासनिक निगरानी और पुलिस बंदोबस्त।
मेला समिति के सदस्यों को व्यवस्थाएं बनाए रखने की जिम्मेदारी दी गई है। शांतिपूर्ण संचालन के लिए विशेष पुलिस बल की तैनाती की मांग की गई है।
आवागमन के साधनों की अतिरिक्त व्यवस्था।
अजमेर और ब्यावर रोडवेज डिपो को अतिरिक्त बसें चलाने हेतु पत्र लिखा गया है। वहीं रेलवे प्रशासन से अजमेर से मारवाड़ जंक्शन तक चलने वाली शटल में अतिरिक्त कोच लगाने की भी मांग की गई है।
राजस्थान में मेलों की शुरुआत का प्रतीक।
मांगलियावास का यह मेला राजस्थान में मेलों के सीजन की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। यह परंपरा पुष्कर में भरने वाले धार्मिक मेले तक जारी रहती है।
धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संगम।
यह मेला प्रदेश में धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक समरसता का परिचायक बन चुका है, जिसमें हर वर्ग, हर आयु के लोग उत्साह से भाग लेते हैं।