ओबीसी आरक्षण आयोग की रिपोर्ट अंतिम चरण में, पंचायत-निकाय चुनावों में बदल सकता है राजनीतिक समीकरण
जयपुर। अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण को लेकर पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकाय चुनावों में बड़ा बदलाव संभव है। अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग ने ओबीसी सीटों के निर्धारण संबंधी रिपोर्ट को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आयोग द्वारा सर्वेक्षण और जिलास्तरीय संवाद के बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप यह रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसके इसी माह पूर्ण होने की संभावना है।
अब तक ओबीसी सीटों के निर्धारण के लिए कोई स्पष्ट और वैज्ञानिक पद्धति लागू नहीं थी। नई प्रक्रिया के तहत प्रत्येक सीट की भौगोलिक स्थिति, सामाजिक संरचना, जनसंख्या अनुपात और क्षेत्रीय परिस्थितियों का अध्ययन कर आयोग सिफारिश तैयार करेगा। इसी आधार पर तय होगा कि ओबीसी आरक्षित सीटें किन क्षेत्रों में और किस वर्ग के प्रतिनिधित्व के लिए निर्धारित होंगी।
कई जिलों में उभरी नई प्रतिनिधित्व की मांग
जिलास्तरीय संवादों के दौरान कई ऐसी ओबीसी जातियों ने राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग उठाई, जिन्हें अब तक बहुत कम या बिल्कुल प्रतिनिधित्व नहीं मिला। वहीं यह तथ्य भी सामने आया कि वर्ष 1952 में ओबीसी सूची में शामिल कुछ जातियों को अपेक्षाकृत कम आरक्षण लाभ मिला, जबकि बाद में सूची में जुड़ी जातियों को इसका अधिक लाभ प्राप्त हुआ।
जिलास्तरीय बैठकों में प्रमुख मांगें
- ओबीसी जातियों को जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण मिले
- मुस्लिम जातियों को ओबीसी और अल्पसंख्यक का दोहरा लाभ न दिया जाए
- केंद्र की तर्ज पर 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण लागू किया जाए
- ओबीसी जाति वर्गीकरण से जुड़ी पूर्व रिपोर्टों को लागू किया जाए
- टीएसपी क्षेत्रों में भी ओबीसी को प्राथमिक प्रतिनिधित्व मिले
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर होगा निर्धारण
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार—
- स्थानीय निकायों में पिछड़ेपन का वैज्ञानिक अध्ययन आवश्यक
- आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ही ओबीसी कोटा तय होगा
- एससी, एसटी और ओबीसी का संयुक्त आरक्षण 50 प्रतिशत की संवैधानिक सीमा से अधिक नहीं होगा
आयोग अध्यक्ष का बयान
आयोग अध्यक्ष मदन लाल ने कहा कि रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट की भावना और संवैधानिक प्रावधानों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। रिपोर्ट में क्या अंतिम सिफारिशें होंगी, यह रिपोर्ट प्रस्तुत होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
राजनीतिक दलों के लिए नई चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि नई सीट-निर्धारण प्रक्रिया लागू होने के बाद पंचायत और नगर निकाय चुनावों में राजनीतिक दलों की रणनीति और समीकरणों में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकता है।