समय पर पंचायत चुनाव नहीं होने से अटका फंड, 1900 करोड़ रुपये पर संकट; केंद्र को पत्र लिखकर राज्य ने मांगी राहत
जयपुर। राजस्थान में पंचायत चुनाव समय पर नहीं होने का असर अब वित्तीय मोर्चे पर दिखने लगा है। प्रदेश की करीब 10 हजार ग्राम पंचायतों को मिलने वाला केंद्रीय फंड संकट में आ गया है। जानकारी के अनुसार, केंद्रीय वित्त आयोग से मिलने वाली लगभग 1900 करोड़ रुपये की राशि अटकने की स्थिति में है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्देशित 15 अप्रैल तक पंचायत चुनाव कराने की समय सीमा में अब महज 29 दिन शेष हैं। यदि इस अवधि में चुनाव नहीं होते हैं, तो राज्य को मिलने वाली अनुदान राशि में देरी या रोक लग सकती है। इससे ग्रामीण विकास से जुड़ी कई योजनाओं पर सीधा प्रभाव पड़ने की आशंका है।
पहले भी रोकी गई थी राशि
सूत्रों के अनुसार, राजस्थान को मिलने वाला करीब 3 हजार करोड़ रुपये का फंड पिछले डेढ़ साल से रुका हुआ था, जिसमें से लगभग 1100 करोड़ रुपये हाल ही में जारी किए गए हैं। यह राशि उन 3800 से अधिक पंचायतों के लिए दी गई है, जिनका कार्यकाल सितंबर-अक्टूबर में समाप्त होने वाला है।
केंद्र को लिखा गया पत्र
स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने भारत सरकार को पत्र लिखकर फंड जारी रखने की मांग की है। सरकार ने नियमों में शिथिलता देने का आग्रह करते हुए अपना पक्ष रखा है, ताकि विकास कार्य प्रभावित न हों।
इन योजनाओं पर पड़ सकता है असर
फंड में देरी या रोक का असर स्वच्छ भारत मिशन, जल जीवन मिशन, मनरेगा समेत अन्य ग्रामीण विकास योजनाओं पर पड़ सकता है। इन योजनाओं के लिए पंचायतों में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का होना अनिवार्य शर्त है।
चुनाव नहीं होने से अटका अनुदान
पंचायती राज व्यवस्था के तहत ग्राम पंचायतों में चुने हुए प्रतिनिधियों का होना जरूरी है। फिलहाल राज्य में कई पंचायतों में चुनाव नहीं होने के कारण प्रशासक नियुक्त किए गए हैं, जिससे अनुदान जारी करने में बाधा आ रही है।
नियमों के अनुसार, 15वें वित्त आयोग की ग्रांट प्राप्त करने के लिए पंचायतों और शहरी निकायों में निर्वाचित संस्थाओं का होना अनिवार्य है।
केंद्र के सामने रखेगा पक्ष
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह इस मुद्दे को केंद्र के सामने मजबूती से उठाएगी और पूरी स्थिति से अवगत कराएगी। इससे पहले भी इस विषय पर केंद्र के अधिकारियों के साथ चर्चा की जा चुकी है।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या समय पर चुनाव हो पाएंगे या फिर फंड जारी करने के लिए केंद्र सरकार से कोई विशेष राहत मिल पाएगी।