मीडिया, शिक्षा और उद्योग के समन्वय पर सीयू राजस्थान में राष्ट्रीय संगोष्ठीराजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय के संस्कृति एवं मीडिया अध्ययन विभाग द्वारा “ब्रिजिंग एकेडेमिया एंड मीडिया कम्युनिकेशन इंडस्ट्री: एस्पिरेशन ऑफ द स्टेकहोल्डर्स
मीडिया, शिक्षा और उद्योग के समन्वय पर सीयू राजस्थान में राष्ट्रीय संगोष्ठी
राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय के संस्कृति एवं मीडिया अध्ययन विभाग द्वारा “ब्रिजिंग एकेडेमिया एंड मीडिया कम्युनिकेशन इंडस्ट्री: एस्पिरेशन ऑफ द स्टेकहोल्डर्स इन व्यू ऑफ एनईपी-2020 फॉर विकसित भारत” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल समापन हुआ। यह संगोष्ठी राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आनंद भालेराव के मार्गदर्शन में हाइब्रिड मोड में आयोजित हुई। संगोष्ठी में संचार शिक्षा को भारतीय ज्ञान परंपरा से समृद्ध करने तथा उद्योग जगत की आवश्यकताओं के अनुरूप ढालने पर विशेष बल दिया गया।
“मीडिया शिक्षा को रोजगारपरक बनाने के लिए उद्योग की आवश्यकताओं को ध्यान में रखना अनिवार्य है। साथ ही, मीडिया उद्योग को भी मानवीय मूल्यों एवं भविष्य की आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु शिक्षण संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित करना चाहिए।” यह कहना था संगोष्ठी के मुख्य अतिथि पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय के प्रो.अनिल अंकित राय का। की नोट स्पीकर के रूप में बोलते हुए अमर उजाला के एडिटोरियल एडवाइजर यशवंत व्यास ने कहा कि आज के विद्यार्थियों को लेखन से लेकर कंटेंट पैकेजिंग तक सभी क्षेत्रों में दक्ष होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने संचार के स्वरूप को बदल दिया है लेकिन मेहनती प्रतिभाएं हमेशा अपना स्थान बना लेती हैं।
इंडो एशियन न्यूज सर्विस की वरिष्ठ पत्रकार डॉ. अर्चना शर्मा ने संचार शिक्षा में यूट्यूब और सोशल मीडिया कंटेंट निर्माण हेतु व्यावहारिक प्रशिक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया वही वरिष्ठ पत्रकार संतोष गुप्ता ने बदलते दौर में नैतिक पत्रकारिता के महत्व को रेखांकित किया। महिला जन अधिकार समिति, अजमेर की प्रमुख इंदिरा पंचोली ने किशोर बालिकाओं को फिल्म निर्माण के माध्यम से सशक्त बनाने के प्रयासों की जानकारी दी।
संगोष्ठी के दौरान “मीडिया संचार, असुरक्षित वर्गों और सामुदायिक समूहों के अधिकार और एस्पिरेशन” और “संचार शिक्षा में भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) का इनक्लूजन” विषयों पर पैनल डिस्कशन भी आयोजित हुआ जिसमें विशेषज्ञों ने प्राचीन भारतीय ज्ञान, कथा साहित्य, तर्कशास्त्र और आधुनिक मीडिया शिक्षण के बीच तालमेल स्थापित करने के विभिन्न तरीकों पर अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने संचार शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा को समाविष्ट करने, तकनीकी दक्षता बढ़ाने और विद्यार्थियों को पेशेवर बनाते हुए समाज के लिए उपयोगी बनाने पर विशेष जोर दिया।
पैनल डिस्कशन में अपने विचार व्यक्त करते हुए भारतीय फिल्म और टेलीविजन संस्थान, पुणे के कुलपति धीरज सिंह ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की सराहना करते हुए कहा कि इसमें परंपरा और आधुनिकता का संतुलन है। उन्होंने बताया कि उनके संस्थान में भरतमुनि के नाट्यशास्त्र के माध्यम से अभिनय और फिल्म निर्माण का प्रशिक्षण दिया जाता है। वरिष्ठ आचार्य प्रो. संजीव भानावत ने पंचतंत्र और हितोपदेश जैसे ग्रंथों को आधुनिक स्टोरीटेलिंग के लिए उपयोगी बताया। भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली की डॉ. रचना शर्मा ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों के समग्र विकास पर बल देती है। जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के मीडिया विभाग के डॉ आशुतोष पांडे ने कहा कि दुनिया को आज शांति की आवश्यकता है। भारतीय ज्ञान परम्परा से मीडिया शिक्षण को समृद्ध कर नए संचार कर्मी गढ़ कर ही समय की जरूरत को पूरा किया जा सकता है। राजस्थान पत्रिका के स्टेट एडिटर अरुण कुमार ने कहा कि सम सामयिक विषयों पर जानकारी का अभाव और भाषा की कमजोरी विद्यार्थियों के सपने पर ग्रहण लगा सकते हैं । गए। राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय की डॉ. साधना श्रीवास्तव ने बाल साहित्य के सृजन की आवश्यकता बताई।
पैनल डिस्कशन में प्रो. राघवेंद्र मिश्र, प्रो. पवित्र श्रीवास्तव, प्रो. प्रशांत कुमार सहित अनेक विशेषज्ञों ने भी अपने विचार साझा किए। संगोष्ठी के दौरान दो तकनीकी सत्र भी आयोजित किए। संगोष्ठी में देशभर के विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए प्रतिभागियों द्वारा लगभग 50 शोधपत्र प्रस्तुत किए गए।
संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के ओपन एवं डिस्टेंस लर्निंग निदेशक प्रो. ओ.पी. देवल ने शिक्षा में संवेदनशीलता और अनुशासन के महत्व पर बल दिया। संगोष्ठी के समन्वयक व विश्वविद्यालय के सामाजिक विज्ञान अधिष्ठाता प्रो. अमिताभ श्रीवास्तव ने भारतीय ज्ञान परंपरा को शिक्षा में शामिल करने पर बल देते हुए विद्यार्थियों को बहुआयामी दक्षता से युक्त करने की आवश्यकता बताई।
अंत में धन्यवाद ज्ञापन करते हुए संस्कृति एवं मीडिया अध्ययन विभाग के विभागाध्यक्ष एवं संगोष्ठी के सह-संयोजक डॉ. प्रांत प्रतीक पटनायक ने कहा कि मीडिया शिक्षा के माध्यम से सामाजिक असमानताओं, विशेषकर जेंडर भेदभाव को कम किया जा सकता है। संगोष्ठी में सीयूराज के अतिरिक्त इलाहाबाद और हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के विद्यार्थी शामिल थे। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी एवं शोधार्थी भी उपस्थित रहे।