उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेम चंद बैरवा का जो राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय द्वारा
राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय में 136वीं अंबेडकर जयंती पर भव्य और दिव्य आयोजन
“शिक्षा केवल ज्ञान अर्जन तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह विद्यार्थियों के जीवन में मूल्यों का भी संचार करे। यदि आपके पास संकल्प है, तो आप देश को बदल सकते हैं।” यह कहना था राजस्थान सरकार उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेम चंद बैरवा का जो राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की 136वीं जयंती के समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सभा को संबोधित कर रहे थे।
विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ इंदुशेखर तत्पुरुष, पूर्व अध्यक्ष, राजस्थान साहित्य अकादमी ने समारोह की शोभा बढ़ाई। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आनंद भालेराव ने की जिनके मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में यह भव्य कार्यक्रम आयोजित हुआ।
मुख्य अतिथि उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेम चंद बैरवा ने अपने भाषण में असमानता और अज्ञानता को “एक बीमारी” की संज्ञा देते हुए युवाओं से आह्वान किया कि वे आगे बढ़कर डॉ. भीमराव अंबेडकर के विज़न के अनुरूप समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाएं। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल नौकरी प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि आत्मसम्मान के लिए प्राप्त की जानी चाहिए।
उन्होंने विशेष रूप से अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों के सपनों का समर्थन करें और उनकी तुलना दूसरों से करने के बजाय उनके संघर्ष में उनके साथ खड़े रहें। उन्होंने कहा, “आपके बच्चों के सपने हैं और उन्हें आगे बढ़ाने की शक्ति आपके पास है। उन्हें केवल शिक्षित ही नहीं, बल्कि अच्छा इंसान भी बनाइए।”
अंत में उन्होंने शिक्षकों से भी आह्वान किया कि वे अपने शिक्षण और मार्गदर्शन के माध्यम से विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाएँ। माननीय उपमुख्यमंत्री ने कुलपति महोदय एवं सभी गणमान्य अतिथियों को बधाई दी तथा कुलपति महोदय के दूरदर्शी नेतृत्व में विश्वविद्यालय द्वारा निर्मित किए जा रहे मूल्यों की सराहना की।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में पहली बार ‘डॉ. बाबासाहेब समाज रत्न पुरस्कार 2026’ प्रदान किया गया। यह पुरस्कार ऐसे व्यक्तियों को सम्मानित करने के उद्देश्य से प्रारंभ किया गया है, जिन्होंने समाज के विभिन्न वर्गों, विशेष रूप से अनुसूचित जाति/जनजाति एवं वंचित समुदायों के उत्थान में उल्लेखनीय योगदान दिया है। प्रथम बार यह पुरस्कार श्रीमती संजया रेगर को दिया गया। इस सम्मान के अंतर्गत उन्हे 51,000 रुपये राशि का चैक,शॉल,स्मृति चिन्ह एवं साईटेशन प्रदान किया गया।
यह पुरस्कार श्रीमती रेगर को उनकी उत्कृष्ट सामाजिक सेवा, आंबेडकरवादी मूल्यों के संवर्धन में भूमिका तथा राष्ट्र निर्माण एवं सामाजिक परिवर्तन के प्रति उनके सतत समर्पण के सम्मान में दिया गया।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ. इंदुशेखर तत्पुरुष ने विश्वविद्यालय के आदर्श वाक्य “तेजस्वि नावधीतमस्तु” को डॉ. भीमराव अंबेडकर के जीवन एवं योगदान से जोड़ते हुए उन्हें श्रद्धापूर्वक स्मरण किया। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर को केवल दलित नेता के रूप में देखना उनकी महानता को सीमित करना है, क्योंकि वे एक असाधारण छात्र, प्रखर विचारक और राष्ट्र निर्माता थे। उन्होंने श्रम कानूनों के क्षेत्र में विशेषकर महिलाओं के सशक्तिकरण हेतु महत्वपूर्ण योगदान दिया।
डॉ. इंदुशेखर ने बताया कि बाबा साहेब ने वंचित वर्गों के उत्थान के लिए अनेक दूरदर्शी प्रयास किए तथा उनका अर्थशास्त्र पर शोध कार्य नीतिगत निर्माण में अत्यंत प्रभावशाली रहा। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने भारत की एकता, शिक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण को अपने जीवन का लक्ष्य बनाया। जहाँ ज्योतिबा फुले ने समाज की पीड़ा को देखा, वहीं डॉ. अंबेडकर ने स्वयं उस पीड़ा को झेला और उसे परिवर्तन की शक्ति में बदल दिया। शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी उन्होंने अपना जीवन वंचित वर्गों के अधिकारों और उत्थान के लिए समर्पित कर दिया।
माननीय कुलपति प्रो. आनंद भालेराव ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा कि विश्वविद्यालय केवल ज्ञान अर्जन का केंद्र मात्र नहीं होता, बल्कि यह विचारों के निर्माण, मूल्यों के संवर्धन तथा राष्ट्र के भविष्य को दिशा देने वाला एक सशक्त मंच होता है। इसी दृष्टिकोण से जयंतियों का आयोजन एक सार्थक शैक्षिक प्रक्रिया है, जो हमें महान व्यक्तित्वों के जीवन और आदर्शों से प्रेरणा प्राप्त करने का अवसर प्रदान करती है।
उन्होंने कहा कि “समाज रत्न पुरस्कार” का उद्देश्य केवल सम्मान प्रदान करना नहीं है, बल्कि समाज में उन व्यक्तियों की पहचान और प्रोत्साहन करना है जिन्होंने निःस्वार्थ भाव से समाज के वंचित और उपेक्षित वर्गों के कल्याण हेतु उल्लेखनीय कार्य किए हैं।
माननीय कुलपति महोदय ने डॉ. भीमराव अंबेडकर के जीवन को प्रेरणास्रोत बताते हुए कहा कि बाबा साहेब ने यह सिद्ध किया कि एक व्यक्ति की दृढ़ इच्छाशक्ति पूरे समाज की दिशा बदल सकती है। उन्होंने हमें यह संदेश दिया कि जीवन में केवल अधिकारों की बात नहीं होनी चाहिए, बल्कि कर्तव्यों का निर्वहन भी उतना ही आवश्यक है।
उन्होंने आगे कहा कि बाबा साहेब का जीवन संघर्षों से परिपूर्ण रहा, परंतु उन्होंने कठिन परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया, बल्कि उन्हें अपनी शक्ति में परिवर्तित किया। उनके लिए ज्ञान केवल साधन नहीं, बल्कि जीवन का उद्देश्य और आधार था।
माननीय कुलपति ने कहा कि बाबा साहेब को स्मरण करना केवल उनके नाम का उच्चारण करना नहीं है, बल्कि उनके संघर्षों को समझना, उनके धैर्य को आत्मसात करना तथा उनकी दूरदृष्टि को अपने जीवन में अपनाना है, जिसने भारत के सामाजिक परिवर्तन की मजबूत नींव रखी।
इससे पूर्व एससी/एसटी एवं ओबीसी सेल के लायजनिंग अधिकारी डॉ. प्रमोद काम्बले ने कार्यक्रम की रूपरेखा साझा की व डॉ. अंबेडकर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (DACE) के समन्वयक, डॉ. भावेश कुमार ने सेंटर की गतिविधियां साझा की।
समारोह के अंतर्गत बाबा साहेब के जीवन, संघर्ष एवं विचारों पर आधारित एक प्रेरणादायी फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। इसके साथ ही, विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को भी मुख्य अतिथि द्वारा सम्मानित एवं पुरस्कृत किया गया।
इसके अतिरिक्त, बाबा साहेब के जीवन, विचारों एवं उनके ऐतिहासिक योगदान को प्रदर्शित करने हेतु एक विशेष प्रदर्शनी (Exhibition) व पुस्तक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया, जो उपस्थित जनों के लिए ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणास्पद अनुभव सिद्ध हुई। कार्यक्रम के अंत में SC/ST/OBC Cell के समन्वयक डॉ. आनंद कुमार धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। मंच संचालन जन संपर्क अधिकारी अनुराधा मित्तल ने किया।
इस भव्य एवं गरिमामय आयोजन में आमंत्रित अतिथियों के साथ-साथ विश्वविद्यालय के अधिकारीगण, शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत व राष्ट्रगान के साथ हुआ।