राजस्थान विधानसभा के 75 वर्ष पूर्ण होने पर पूर्व एवं वर्तमान विधायकों का विशेष कार्यक्रम (विधाई गौरव यात्रा) आयोजित
विधानसभा में गत 75 वर्षों के दौरान पारित विशिष्ट अधिनियमों पर चर्चा
राजस्थान विधानसभा के 75 वर्ष पूर्ण होने पर पूर्व एवं वर्तमान विधायकों का विशेष कार्यक्रम (विधाई गौरव यात्रा) आयोजित
ऐतिहासिक कानूनों और जनकल्याणकारी विधायी परंपरा पर हुआ व्यापक मंथन
लोकतांत्रिक परंपराओं को सुदृढ़ करने का आह्वान
जयपुर, 15 जुलाई। राजस्थान विधानसभा के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में विधानसभा में आयोजित विधायी गौरव यात्रा के प्रथम सत्र में राजस्थान विधान सभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, विधान सभा के पूर्व अध्यक्ष डॉ. सी.पी. जोशी और राष्ट्र मण्डल संसदीय संघ के सचिव श्री संदीप शर्मा ने मंच का संचालन किया। इस सत्र में राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में राजस्थान विधानसभा की गौरवशाली विधायी परंपरा, लोकतांत्रिक मूल्यों तथा जनहितकारी कानूनों के निर्माण पर विस्तृत चर्चा की गई।
विधानसभा में सार्थक बहस लोकतंत्र की आत्मा –
डॉ. सी.पी. जोशी ने कहा कि लोकतंत्र की सफलता का आधार स्वस्थ एवं तथ्यपरक बहस है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विधायक को विधानसभा की कार्यवाही एवं विधेयकों पर पूरी गंभीरता और सक्रियता से भाग लेना चाहिए। किसी भी कानून के प्रत्येक प्रावधान पर सुव्यवस्थित एवं प्रभावी चर्चा होना लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विधायी बहस के दौरान सभी जनप्रतिनिधियों को व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर उठकर जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने राजस्थान विधान सभा सदस्य (निरर्हता निवारण) अधिनियम, 1969 तथा राजस्थान लोकायुक्त एवं उप-लोकायुक्त अधिनियम, 1973 की आवश्यकता, उनकी विधायी प्रक्रिया और राज्य के लोकतांत्रिक ढांचे को सुदृढ़ करने में उनकी भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।
भूमि सुधार, लोकतांत्रिक अधिकार एवं जनकल्याणकारी कानूनों पर विचार-विमर्श-
पूर्व विधायक पंडित रामकिशन शर्मा ने सर्वोदय-भूदान आंदोलन के सामाजिक प्रभावों पर अपने विचार व्यक्त करते हुए इसे सामाजिक समरसता और स्वैच्छिक भूमि सुधार का महत्वपूर्ण अभियान बताया। राज्यसभा सांसद एवं पूर्व विधायक घनश्याम तिवाड़ी ने राजस्थान भूमि सुधार एवं जागीर पुनर्ग्रहण अधिनियम, 1952 पर चर्चा करते हुए कहा कि राजस्थान के किसानों को उनकी भूमि का स्वामित्व प्रदान करने वाला देश का अग्रणी प्रदेश है। उन्होंने कहा कि भूमि सुधारों के कारण ही देश खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बना और इसमें राजस्थान की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पूर्व विधायक डॉ. जितेन्द्र सिंह ने राजस्थान आवश्यक सेवाएँ अनुरक्षण अधिनियम, 1970 के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आवश्यक जनसेवाओं को हड़तालों से बाधित होने से बचाना जनहित के लिए अत्यंत आवश्यक था।
सूचना का अधिकार, वित्तीय अनुशासन एवं भूमि सुधारों पर वक्ताओं ने रखे विचार-
बूंदी विधायक हरिमोहन शर्मा ने राजस्थान सूचना का अधिकार अधिनियम, 2000 की पृष्ठभूमि एवं इसके पारित होने की प्रक्रिया की जानकारी देते हुए इसे पारदर्शी एवं जवाबदेह शासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। पूर्व विधायक राजपाल सिंह शेखावत ने राजस्थान राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) अधिनियम, 2005 पर चर्चा करते हुए कहा कि इस कानून ने राज्य के वित्तीय अनुशासन, वित्तीय स्थिरता, उत्तरदायी उधारी तथा सरकारी वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता को नई दिशा प्रदान की। पूर्व विधायक श्री प्रभुलाल सैनी ने राजस्थान कृषि जोतों पर सीमा अधिरोपण अधिनियम, 1973 तथा भूमि सुधारों के माध्यम से भूमिहीन किसानों को भूमि का स्वामित्व प्रदान किए जाने की ऐतिहासिक प्रक्रिया पर अपने विचार रखे।
गोसंवर्धन एवं संरक्षण संबंधी कानूनों की भूमिका पर भी हुई चर्चा-
पूर्व विधायक ज्ञानचंद पारख ने राजस्थान गो-सेवा आयोग अधिनियम, 1995 तथा राजस्थान गोवंश (वध प्रतिषेध एवं अस्थायी प्रव्रजन या निर्यात का विनियमन) अधिनियम, 1995 की चर्चा करते हुए कहा कि इन कानूनों ने गौशालाओं को सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ गोवंश संरक्षण को संस्थागत आधार प्रदान किया। कार्यक्रम के अंत में सभी वक्ताओं ने राजस्थान विधानसभा की 75 वर्षों की गौरवशाली लोकतांत्रिक यात्रा का स्मरण करते हुए जनहित, पारदर्शिता एवं संवैधानिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
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