विधानसभा सदस्यता मामले में जल्द होगा निर्णय, अध्यक्ष देवनानी ने महाधिवक्ता से मांगी विधिक राय
जयपुर, 20 मई।
राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने विधायक कंवरलाल की सदस्यता समाप्ति के मामले में त्वरित निर्णय की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। उन्होंने राज्य के महाधिवक्ता को निर्देशित किया है कि वे इस विषय में अपनी विधिक राय जल्द से जल्द राजस्थान विधानसभा सचिवालय को प्रेषित करें। देवनानी ने आशा व्यक्त की है कि महाधिवक्ता की विधिक राय एक-दो दिनों में प्राप्त हो जाएगी, जिसके पश्चात न्यायसम्मत एवं विधिसम्मत निर्णय तत्काल लिया जाएगा।
इस मुद्दे को लेकर मंगलवार को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के नेतृत्व में प्रतिपक्ष के सदस्यों ने अध्यक्ष से भेंट की। उन्होंने विधायक कंवरलाल की सदस्यता समाप्त करने हेतु शीघ्र निर्णय की मांग करते हुए एक ज्ञापन भी सौंपा। जवाब में देवनानी ने आश्वासन दिया कि इस विषय में निष्पक्ष एवं न्यायिक दृष्टिकोण अपनाते हुए शीघ्र निर्णय लिया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि न्यायालय द्वारा विधायक कंवरलाल के विरुद्ध दिए गए निर्णय के दिन ही विधानसभा अध्यक्ष ने महाधिवक्ता से विधिक राय लेने का निर्देश दे दिया था। देवनानी स्वयं इस मामले की प्रगति की निरंतर समीक्षा कर रहे हैं। उनका कहना है कि किसी भी सदस्य की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने का निर्णय गंभीर एवं संवेदनशील होता है, जिसमें न्यायालय के आदेश की समग्र व्याख्या करना आवश्यक है ताकि किसी के साथ अन्याय न हो।
विधानसभा समितियों में आंशिक संशोधन पर भी हुई चर्चा
विधानसभा सचिवालय द्वारा हाल ही में समितियों में किए गए आंशिक संशोधन पर भी प्रतिपक्ष के सदस्यों ने चर्चा की। इस संदर्भ में अध्यक्ष देवनानी ने स्पष्ट किया कि वरिष्ठ सदस्य नरेंद्र बुड़ानिया को किसी समिति से हटाया नहीं गया है, बल्कि उन्हें सामाजिक न्याय से संबंधित ‘पिछड़े वर्गों के कल्याण’ समिति का सभापति बनाया गया है, जो एक अत्यंत महत्वपूर्ण समिति है। उन्होंने कहा कि बुड़ानिया सहित तीन अन्य सभापतियों का भी पुनर्गठन किया गया है, जिसमें सत्तापक्ष के सदस्य भी सम्मिलित हैं। यह निर्णय सदन की कार्यप्रणाली की प्रभावशीलता बढ़ाने और अनुभवजन्य नेतृत्व को उचित स्थान देने की दृष्टि से लिया गया है।
सदन के कार्य संचालन पर विस्तार से सकारात्मक चर्चा
विधानसभा अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष के बीच इस बैठक में सदन के सुचारु संचालन, समितियों की बैठकें, प्रश्नोत्तर काल, और कार्य दिवसों से जुड़े विषयों पर भी सकारात्मक एवं रचनात्मक चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने विधानसभा की कार्य प्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और उत्तरदायी बनाने के संकल्प को दोहराया।