1 मार्च 2027 से देश में शुरू होगी जातीय जनगणना, दो चरणों में होगी गणना, कई राज्यों में पहले चरण में होगी शुरुआत
नई दिल्ली: देशभर में लंबे समय से चली आ रही मांग के बाद केंद्र सरकार ने जातीय जनगणना को लेकर बड़ा फैसला लिया है। 1 मार्च 2027 से जातीय जनगणना की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू होगी। यह जनगणना दो चरणों में कराई जाएगी और देश के विभिन्न हिस्सों में चरणबद्ध तरीके से लागू होगी।
सूत्रों के अनुसार, जातीय जनगणना की तैयारी अब अंतिम चरण में है और सरकार ने इसके लिए राज्यों को जरूरी दिशानिर्देश भेज दिए हैं।
🔹 पहला चरण:
चार राज्यों — हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और उत्तराखंड — में 1 अक्टूबर 2026 से जातीय जनगणना की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इन राज्यों में मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए पहले चरण में ही जनगणना कराई जाएगी।
🔹 दूसरा चरण:
इसके बाद 1 मार्च 2027 से पूरे देश में जातीय जनगणना का दूसरा चरण शुरू होगा, जो बड़े पैमाने पर सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लागू किया जाएगा।
👉 यह जातीय जनगणना स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार इतने व्यापक स्तर पर आयोजित की जा रही है, जिससे समाज के सभी वर्गों की वास्तविक सामाजिक, आर्थिक स्थिति का आंकलन किया जा सकेगा।
📌 सरकारी सूत्रों की मानें तो यह डेटा भविष्य की नीतियों, आरक्षण व्यवस्था, और सामाजिक न्याय योजनाओं के निर्माण में आधार बनेगा।
📢 राजनीतिक और सामाजिक संगठनों में हलचल:
इस घोषणा के बाद देशभर में राजनीतिक गलियारों से लेकर सामाजिक संगठनों में भी चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। जातीय जनगणना को लेकर अलग-अलग विचार सामने आ रहे हैं, लेकिन अधिकांश सामाजिक संगठनों ने इसका स्वागत किया है।
📅 महत्वपूर्ण तारीखें:
- 1 अक्टूबर 2026: हिमाचल, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और उत्तराखंड में शुरुआत
- 1 मार्च 2027: देशव्यापी जातीय जनगणना की शुरुआत
📝 सरकार जल्द ही विस्तृत दिशा-निर्देश और अधिसूचना जारी करेगी।
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